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Text 147: Christian Weise, Jugendlust, Leipzig 1684 |
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[ Seite 79 ] |
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01 |
Anderer Handlung |
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02 |
Erster Aufzug. |
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03 |
Eurymedes, Cleobolus. |
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04 |
Eur. |
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05 |
WO der Koͤnig verrathen ist/ da muͤssen die |
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06 |
ehrlichsten Diener beschaͤmet werden. |
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07 |
Cleob. Und wo die ehrlichsten Diener die |
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08 |
hoͤchste Verfolgung ausstehen sollen/ da werden sich |
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09 |
alle redliche Gemuͤther vom Hofe begeben. |
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10 |
Eur. Herr Poliarchus wird verdammt/ ehe man |
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11 |
das Verbrechen beweisen kan. |
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Cleob. Den Feinden ist viel daran gelegen/ daß die |
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Unschuld bestraft wird; Darnach werden sie der |
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14 |
verstorbenen Tugend ein Grabmahl von Marmor |
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15 |
aufrichten. |
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Eur. Jm neulichsten Treffen hat er sich unvergleichlich |
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gehalten. |
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Cleob. Drum wollen die Feinde erst nach seinem |
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Tode fechten. |
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20 |
Eur. Und hingegen der Koͤnig solte sein Leben mit |
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21 |
hohen Verdienste bezahlen. |
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22 |
Cleob. Die Widersacher sind Schuld daran/ daß |
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23 |
wir viel wuͤnschen und wenig helffen koͤnnen. |
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24 |
Eur. Warum ist mein Rath allezeit verachtet worden? |
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25 |
Jch sage nach einmahl/ wo ein Koͤnig von guten |
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26 |
Soldaten entbloͤßet ist/ da steht seine Sicherheit |
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27 |
auf einem sandichten Boden. |
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28 |
Cleob. Jch wolte lieber sprechen: Wo ein Koͤnig |
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[ Seite 80 ] |
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01 |
allzusanfftmuͤthig ist/ da wird der beste Rath von |
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02 |
Soldaten nicht angehoͤret. |
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03 |
Eur. Ach haͤtten wir eine Armée, davor sich die |
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04 |
Rebellen entsetzen muͤsten│ |
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05 |
Cleob. Ach haͤtten wir einen Koͤnig/ welchen die |
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06 |
Unterthanen nicht verspotten duͤrfften│ |
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07 |
Eur. O haͤtten wir nur den tapfferen Poliarchus |
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08 |
auf unserer Seite│ |
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09 |
Cleob. Wo ich wuͤnschen darff/ so werde ich endlich |
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10 |
sprechen: O solte ich bey dem itzigen Zustande |
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11 |
nicht leben│ |
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12 |
Anderer Handlung |
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13 |
Anderer Aufzug. |
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14 |
Eurymedes, Cleobolus, Nicopompus |
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15 |
Ascanius. |
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16 |
Eur. |
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17 |
WAs bringt dieser Mann? |
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18 |
Cleob. Es mangelt ihm keinmahl an Zeitungen: |
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19 |
Aber die guten Zeitungen werden sich allmaͤhlich |
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20 |
seltzam machen. |
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21 |
Eur. Wohinaus/ ihr Claritaͤten? |
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22 |
Nic. Eur Gnaden und Exc. zu dienen. |
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23 |
Eur. Meines Dienstes halben seyd ihr gewiß nicht |
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24 |
ausgegangen. |
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25 |
Nic. Doch nach deroselben Gefallen werde ich |
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26 |
meine andere Gelegenheit zuruͤcke setzen. |
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27 |
Eur. Jch will euch nicht verhindern. Allein habt |
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28 |
ihr nichts neues? |
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[ Seite 81 ] |
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01 |
Nic. Neues genung/ aber auch viel trauriges. |
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02 |
Eur. Ein Hof--Poete soll sich auf lustige Sachen |
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03 |
befleissigen. |
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04 |
Nic. Ein Poete ist des Himmels Affe: Was |
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05 |
oben beschlossen wird/ beschliesst er auch in seinen |
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06 |
Versen. |
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07 |
Eur. Jch habe bey diesem Gleichnisse nichts zu erinnern. |
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08 |
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09 |
Nic. Jhr. Gnaden und Exc. nicht aufzuhalten: |
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10 |
Hr. Poliarchus ist todt. |
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11 |
Eur. Wer ist todt? |
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12 |
Nic. Hr. Poliarchus hat bey juͤngsten Nacht--Feuern |
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13 |
wollen durchgehen; Und wie er sich einem |
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14 |
ungewissen Strome anvertrauet/ so ist er im Wasser |
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15 |
geblieben. |
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16 |
Eur. Die Zeitung scheinet mir zu unglaͤublich. |
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17 |
Nic. Was mir sein eigener Diener erzehlet/ davon |
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18 |
kan ich mit gutem Gewissen ein Avisen--Lied machen. |
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19 |
Eur. Jn wichtigen Dingen wartet man auf die |
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20 |
Confirmation. |
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21 |
Nic. Wer mit Zeitungen handelt/ der muß die Exemplaria |
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22 |
vor der Confirmation verkauffen/ sonst |
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23 |
bleibet ihm der Bettel uͤber dem Halse. |
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24 |
Eur. So habt mit euren boͤsen Zeitungen ein gutes |
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25 |
Jahr. Wir wollen eure Freyheit in gewisse |
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26 |
Schrancken einfassen/ damit der Betruͤgerey gesteuret |
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27 |
werde. [ gehen ab. ] |
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[ Seite 82 ] |
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01 |
Anderer Handlung |
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02 |
Dritter Aufzug. |
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03 |
Nicopompus, Ascianius, hernach Nisus, |
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04 |
Phorbas, Hermocrates, Pollio, |
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05 |
Mopsa, Gelasina. |
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06 |
Nicop. |
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07 |
GEht hin/ ihr lieben Herren; Auf euren Beutel |
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08 |
mache ich keine Lieder/ und euch zu Gefallen wird |
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09 |
kein Mensch die Zeitungen ungelesen lassen. |
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10 |
Doch ihr Leute/ ihr Einwohner in Syracusa, wo |
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11 |
seyd ihr? Kommet her/ und hoͤret von schroͤcklichen |
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12 |
Dingen: Von Wunderzeichen/ von Todes--Faͤllen/ |
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13 |
mit einem Worte/ von neuen Zeitungen. Was |
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14 |
mein lieber Sohn singen wird/ das ist so wahr/ als |
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15 |
ich meine Nase uͤber dem Maule trage. Glaubet |
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16 |
mir in der Zeit/ so wisst ihrs in der Noth; Kauffet |
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17 |
in der Zeit/ so habt ihrs in der Noth; Schickt |
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18 |
euch in die Zeit/ so schadt euch keine Noth. Nun |
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19 |
mein Ascanius, stimme an/ die Leute muͤssen zusammen kommen. |
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20 |
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21 |
[ Nicopompus und Ascanius singen/ nach |
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22 |
der Melodey: Ach traute Schwester |
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23 |
mein. Jn waͤhrenden Singen ziehen |
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24 |
sich die Leute heraus und hoͤren zu. ] |
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[ Seite 84 ] |
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01 |
Nis. Gluͤck zu/ Herr Luͤgen--Schreiber│ Wie theuer |
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02 |
ist ein Brief/ der nicht wahr ist? |
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03 |
Nic. Jch verstehe euch wohl. Eine Luͤgen vor einen |
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04 |
Groschen. |
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05 |
Nis. So kost ein solcher Zettel hundert Thaler. |
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06 |
Nic. Wer die Kunst auch kan/ der mag einen |
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07 |
Dreyer geben. |
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08 |
Nis. Das war ein Wort. Aber nehmt ihr auch |
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09 |
schlimm Geld vor schlimme Wahre? |
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10 |
Nic. Nein; Schlimme Kaͤuffer sind mir lieb/ |
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11 |
wenn sie nur gut Geld bringen. |
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12 |
Nis. Da ist ein abgesetzter Plappert; Gebt mir |
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13 |
drey Briefe davor. |
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14 |
Nic. Um eines andernmahls willen thue ich das. |
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15 |
[ gibts ihm. ] |
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16 |
Phor. Jst vor mich nichts uͤbrig? |
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17 |
Nic. Nur Geld her. Meine Wahrheit ist mir |
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18 |
feil. |
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19 |
Phor. Ja handelt ihr mit Wahrheit? So kom̅ |
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20 |
ich unrecht an. |
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21 |
Nic. Verstehet mich doch recht: Es ist ja wahr/ |
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22 |
daß wir einander was abkauffen wollen. |
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23 |
Phor. Und es ist auch wahr/ daß ihr mir Luͤgen verkauffet. |
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24 |
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25 |
Nic. Bezahlet mirs nur/ und heisset es wie ihr |
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26 |
wollet. |
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27 |
Phor. Da ist Geld. Wo ist euer Papier? |
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28 |
Nic. ( gibts ihm. ) |
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29 |
Mops. Guten Tag/ Hr. kluger Mann. |
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30 |
Nic. Das war ein Titul vor einen Hof--Poeten. |
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31 |
Grossen Danck/ kluge Frau. |
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[ Seite 85 ] |
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01 |
Mops. O ihr seht mich vor die unrechte an. |
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02 |
Nic. So lasst mich zu frieden: Jch sehe euch vor |
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03 |
eine Frau an/ die Geld hat/ und die mir was abkauffen |
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04 |
will. Bin ich unrecht/ so will ich vor aller Welt um |
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05 |
Verzeihung bitten. |
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06 |
Mops. Daß ihr eben wisset/ was ich will: Jch |
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07 |
bin ausgeschickt/ und soll fragen/ ob der fremde Herr |
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08 |
gewiß ersoffen ist. |
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09 |
Nic. Da stehts; Wer es nicht glaͤuben will/ dem |
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10 |
weiset nur den Zettel. |
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11 |
Mops. Jch kan es aber nicht glaͤuben. |
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12 |
Nic. So bestellt euch einen Zeitungs--Schreiber/ |
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13 |
der den lieben Herren wieder lebendig macht; Jn |
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14 |
meinen Versen ist er gestorben. |
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15 |
Gel. ( kömmt gelauffen. ) Jhr altes Fell/ wo |
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16 |
bleibt ihr so lange? Man solte euch ofte nach nothwendigen |
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17 |
Zeitungen ausschicken. |
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18 |
Mops. Kan ich davor/ daß ich auf gute Zeitungen |
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19 |
warten muß? |
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20 |
Gel. Jhr Luͤgen--Kraͤmer/ warum lasset ihr die ehrliche |
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21 |
Frau warten? |
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22 |
Nic. Jch will es mit meinem hoch--loͤblichen Auditorio |
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23 |
beweisen/ daß die gute Frau nirgend ist aufgehalten |
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24 |
worden. |
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25 |
Gel. Wisset ihr auch/ was die Sache zu bedeuten |
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26 |
hat/ wenn ein Bote aus dem Koͤniglichen Frauen--Zimmer |
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27 |
geschicket wird? |
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28 |
Nic. Das hat es zu bedeuten: Der Bote muß |
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29 |
Antwort zuruͤcke bringen. |
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30 |
Gel. Wo steckt aber die Antwort? Die Fr. Hofemeisterin |
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31 |
will wissen/ ob der fremde Herr gestorben |
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32 |
ist. |
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[ Seite 86 ] |
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01 |
Nic. Ob er gestorben ist/ das kan ich nicht wissen; |
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02 |
Aber daß er im Flusse ersoffen ist/ daran ist kein |
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03 |
Zweifel. |
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04 |
Gel. Warum ist kein Zweifel? Gewiß weil es auf |
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05 |
dem verlogenen Zettel geschrieben steht. Jch rathe |
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06 |
euch guts/ wo ihr einen blinden Lermen macht/ so lerne |
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07 |
ich wider euch Verse schreiben. |
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08 |
Nic. Junge/ komm her/ und singe mir das Lied/ |
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09 |
dem Murmel--Thier zu Trotze. |
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10 |
Gel. Und ihr Leute/ kommt doch her/ und helfft mir |
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11 |
den wilden Ochsen steinigen. |
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12 |
Nic. Wer mill mich auf freyen Marckte steinigen? |
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13 |
Gel. Das will ich thun. Trotz daß iemand die |
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14 |
Luͤgen noch einmahl singt│ |
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15 |
Nic. Junge/ wir muͤssen singen; Sonst faͤllet |
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16 |
unser Respect in den Qvarck. |
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17 |
[ Sie wollen anfangen; Aber es kömmt |
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18 |
zur Schlaͤgerey/ und werden seine Briefe |
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19 |
zerrissen. Die Weiber lassen sich |
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20 |
weidlich herum weltzen/ bis sie davon lauffen. |
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21 |
) |
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22 |
Anderer Handlung |
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23 |
Vierdter Aufzug. |
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24 |
Hermocrates, Pollio. |
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25 |
Herm. |
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26 |
DAs war eine lustige Comœdie. |
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27 |
Poll. Lustig anzusehn; Aber vor die guten Weiber |
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28 |
war sie nicht lustig zu spielen. |
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[ Seite 87 ] |
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01 |
Her. Wer fragt darnach? Unterdessen haben |
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02 |
wir gelacht. |
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03 |
Poll. Und ich habe etliche Avisen--Zettel umsonst |
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04 |
kriegt. |
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05 |
Her. Wir werden zu Hause viel auszutheilen |
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06 |
haben. |
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07 |
Poll. Mein Hr. Hofemeister ist solchen Possen |
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08 |
nicht gut; Jch darff mich mit der Wahre nicht blicken |
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09 |
lassen. |
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10 |
Her. Jch moͤchte gerne wissen/ warum? |
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11 |
Poll. Er saget/ es waͤre Qvarck/ damit man die |
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12 |
Bauern besalbete: Doch eine Staats--Person solte |
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13 |
sich schaͤmen/ wenn sie mit Bauer--Briefen zu thun |
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14 |
haͤtte. |
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15 |
Her. So muß der Hofemeister auch kein Brodt |
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16 |
fressen; Denn wo mir recht ist/ so essen es auch die |
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17 |
Bauren. |
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18 |
Poll. Es ist Schade/ daß ihr nicht groͤsser seyd; |
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19 |
Jhr muͤstet sonst mein Hofemeister werden. |
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20 |
Her. Ja wir wolten das Regiment besser fuͤhren/ |
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21 |
und die Feyertage solten im Kalender ein ander Ansehen |
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22 |
haben. |
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23 |
Poll. Nun/ ich darff mich nicht aufhalten. Wo der |
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24 |
Hofemeister hoͤrt/ daß Herr Poliarchus gestorben ist/ |
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25 |
so krieg ich in sechs Tagen kein gut Wort. |
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26 |
Her. Jch daͤchte/ was ginge mich der fremde |
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27 |
Kerl an? |
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28 |
Pol. Er hat sich eingebildet/ wenn Hr. Poliarchus |
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29 |
ein grosser Man̅ wuͤrde/ so koͤnte er ein Amt bekom̅en. |
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30 |
Her. Was denn vor ein Amt? Gewiß die Befoͤrderung |
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31 |
zu einen Hof--Poeten? |
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[ Seite 88 ] |
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01 |
Poll. O nein; Er hat brav studiret: Wenn er |
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02 |
so viel koͤnte von sich geben/ als er im Kopffe hat/ es |
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03 |
waͤre seines gleichen nicht. |
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04 |
Her. So kan ich nicht davor/ wo er auf das Canzler--Dienst |
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05 |
vergebens gewartet hat. |
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06 |
Poll. Ja/ ja; Und also werde ich mich auf eine |
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07 |
boͤse Woche gefast machen. |
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08 |
Her. Jch wolte sprechen/ es waͤre Zeitung kommen/ |
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09 |
als wenn er noch lebte. |
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10 |
Pol. Jch kan mit Luͤgen noch nicht wohl fortkommen; |
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11 |
Es bricht doch aus. |
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12 |
Hermocr. So wuͤnsche ich viel Gluͤcks zur boͤsen |
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13 |
Woche. |
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14 |
Pol. Wer mich verspottet/ dem wuͤnsche ich eben |
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15 |
so viel. [ gehen ab. ] |
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16 |
Anderer Handlung |
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17 |
Fuͤnffter Aufzug. |
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18 |
[ Die mittelste Scene eroͤffnet sich. Argenis |
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19 |
und Selenisse ringen mit einander/ |
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20 |
und treiben einander bis auf die euserste |
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21 |
Scene. ] |
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22 |
Arg. |
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23 |
JCh bleibe doch bey meinen Gedancken. |
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24 |
Sel. So muß ich mich allezeit der Prinzeßin |
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25 |
widersetzen. |
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26 |
Arg. Soll ich leben/ da mein Poliarchus gestorben |
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27 |
ist? |
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28 |
Sel. Soll sie sterben/ da ihr Hr. Vater noch lebet? |
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[ Seite 89 ] |
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01 |
Arg. Das weis ich: Poliarchus wuͤrde meinen |
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02 |
Tod nicht lange uͤberlebet haben. |
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03 |
Sel. Und das weis ich/ daß der Koͤnig nach ihrem |
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04 |
Tode seines Lebens Ende verlangen wuͤrde. |
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05 |
Arg. Ach Mutter/ ihr habt mich zu aller Tugend |
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06 |
auferzogen; Verhindert mich an dieser letzten |
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07 |
Schuldigkeit nicht. |
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08 |
Sel. Das ist keine Tugend/ wenn man sterben |
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09 |
will. |
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10 |
Arg. O ja/ wenn man die ehrliche Liebe dadurch |
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11 |
bestaͤtiget. |
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12 |
Sel. Wie aber/ wenn Poliarchus noch lebte? |
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13 |
Wenn er sein Blut hernach mit dem ihrigen vermischen |
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14 |
solte/ wer haͤtte alsdenn seine Tugend erwiesen? |
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15 |
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16 |
Arg. Er ist gewiß todt; Jch muß ihm folgen. |
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17 |
Sel. Jch hoffe/ er lebet; Jch muß das groͤste Ungluͤck |
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18 |
verhindern. |
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19 |
Arg. Lasset mir den Willen: Denn was ist euch |
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20 |
daran gelegen/ daß ich eine Stunde langsamer |
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21 |
sterbe? |
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22 |
Sel. Sie nehme gute Warnungen an/ sonst ruffe ich |
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23 |
um Huͤlffe. |
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24 |
Arg. Was ist mir die Huͤlffe von noͤthen/ da mein |
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25 |
Trost nicht mehr in der Welt lebet? |
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26 |
Sel. Jch begehre ihr nicht zu helffen/ sondern dem |
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27 |
ehrlichen Poliarchus: Diesem will ich die getreueste |
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28 |
Liebste beym Leben erhalten. |
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29 |
Arg. Ach so schmeichelt man einfaͤltigen Personen. |
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30 |
Sel. Jch bitte/ sie verziehe/ bis ein gewisser Bote |
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31 |
koͤmmt/ der den Coͤrper gesehen hat. Sonst moͤchte |
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[ Seite 90 ] |
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01 |
die Fabel von Pyramo und Thisbe in einem vornehmen |
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02 |
Exempel zur Historie werden. |
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03 |
Arg. Weil ihr denn so gar unbarmhertzig seyd/ |
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04 |
daß ich noch etliche Tage meiner hoͤchsten Vergnuͤgung |
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05 |
soll beraubet seyn/ so mag das elende Messer |
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06 |
verflucht und verrostet bleiben. |
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07 |
[ Sie wirfft das Messer hin. ] |
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08 |
Sel. Jch weis/ Poliarchus wird dieses verrostete |
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09 |
Messer mit hohem Gelde bezahlen. |
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10 |
Anderer Handlung |
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11 |
Sechster Aufzug. |
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12 |
Argenis, Selenisse, Arsidas. |
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13 |
Arsid. |
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14 |
JHre Hoheit vermercken die ungestuͤme Hereinkunft |
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15 |
in keinen Ungnaden. |
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16 |
Arg. Kommt nur her/ und helfft meiner Selenisse |
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17 |
aus dem Traume/ und mir aus dem Ungluͤcke/ daß ich |
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18 |
leben soll. Habt ihr nicht meinen Poliarchus gesehen? |
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19 |
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20 |
Ars. Ja/ ich kan es nicht leugnen; Und eben deßwegen |
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21 |
komme ich/ die gewisse Zeitung zubringen. |
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22 |
Arg. Mein Messer her; Nun koͤmmt ein Zeuge/ |
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23 |
der den geliebtesten Coͤrper gesehen hat. |
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24 |
Ars. Wer sagt von einem Coͤrper? Den lebendigen |
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25 |
Poliarchus habe ich gesehen/ und dessen Befehl |
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26 |
treibet mich an diesen Ort/ darein ich so kuͤhne getreten |
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27 |
bin. |
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[ Seite 91 ] |
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01 |
Arg. Wie lange hat euch meine Selenisse unterrichtet/ |
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02 |
ehe die Fabel ist erdacht worden? |
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03 |
Ars. Jch werde heute nicht anfangen/ meine hoͤchstgebietende |
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04 |
Prinzeßin mit Unwahrheit zu beleidigen. |
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05 |
Arg. Wo lebt er denn? |
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06 |
Ars. Bey der gutthaͤtigen Timoclea: Diese hat |
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07 |
in ihrem Hause/ zu gutem Gluͤcke/ einen verborgenen |
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08 |
Keller eroͤffnet/ da er sich/ auf bessere Zeit/ sicher aufhalten |
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09 |
kan. |
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10 |
Arg. Woher entstehet aber die Zeitung des Todes? |
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11 |
Ars. Sie ist von uns ausgesprenget worden/ damit |
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12 |
die Feinde im Verfolgen desto nachlaͤssiger wuͤrden. |
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13 |
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14 |
Arg. Mein Freund/ vergebet mir/ daß ich keinen |
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15 |
sonderlichen Danck vor die Post abstatten kan. Das |
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16 |
allzuheftige Schrecken hat mich so uͤbertaͤubet/ daß ich |
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17 |
in Furcht und Zweifel die Wahrheit nicht zu begreiffen |
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18 |
weiß. |
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19 |
Ars. Er hat zu seinem Gluͤcke einen fremden Cavallier |
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20 |
mit sich/ dessen Bekanntschaft gleich den ungluͤckseligen |
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21 |
Abend beschlossen/ und durch die Gefahr |
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22 |
selbst ist befestiger worden. |
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23 |
Arg. Die Person soll mir gleichfalls angenehm |
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24 |
seyn. |
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25 |
Ars. Jch hoͤre/ das ungestuͤme Land--Volck hat sich |
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26 |
des ehrlichen Fremdlings bemaͤchtiget; Und weil er |
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27 |
vor den Poliarchus gehalten wird/ so moͤchte er bald |
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28 |
zu Hofe/ als ein Gefangener/ gestellet werden. |
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29 |
Arg. Es wird ihm zu hohen Ehren gereichen/ daß |
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30 |
er wuͤrdig ist/ diese Person zu vertreten. |
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[ Seite 92 ] |
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01 |
Anderer Handlung |
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02 |
Siebender Aufzug. |
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03 |
Die Vorigen/ Meleander, Eurymedes, |
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04 |
Cleobulus, Hierolander, Timonides. |
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05 |
Mel. |
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06 |
GEliebteste Tochter/ einen gesegneten schoͤnen und |
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07 |
guten Morgen. |
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08 |
Arg. Wo mein Koͤniglicher Herr Vater wohl |
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09 |
geruhet hat/ ist mirs hertzlich lieb zu vernehmen. |
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10 |
Mel. Aber aus dem blassen Gesichte kan ich abnehmen/ |
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11 |
daß ihr allzuviel nicht geruhet habt. |
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12 |
Sel. Die Zeiten sind nicht darnach/ daß man allzufrische |
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13 |
Farbe im Gesichte weisen kan; Jhr. Maj. |
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14 |
leben in continuirlichen Sorgen/ und eine gehorsame |
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15 |
Tochter gedencket/ ihr Theil muͤsse auch dabey getragen |
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16 |
werden. |
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17 |
Mel. Gott wird der Zeit einen bessern Wechsel |
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18 |
vergoͤnnen/ und alsodann soll auch die Farbe des Gesichtes |
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19 |
ausgeklaͤret werden. |
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| |
20 |
Sel. Es sind viel Ursachen/ derentwegen man dergleichen |
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| |
21 |
Gluͤckseligkeit wuͤnschen soll. |
|
| |
22 |
Eur. Jhr. Maj. ich vernehme/ es laͤsst sich eine |
|
| |
23 |
Compagnie Bauern anmelden/ die sich ruͤhmen/ als |
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| |
24 |
sey Hr. Poliarchus von ihnen gefunden worden. |
|
| |
25 |
Mel. Jch dachte/ er haͤtte sein Leben im Wasser |
|
| |
26 |
eingebuͤsset. |
|
| |
27 |
Eur. Weil die Post anders einlaͤufft/ so muß das |
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| |
28 |
erste nothwendig falsch seyn. |
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| |
[ Seite 93 ] |
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| |
01 |
Mel. Jst er gefangen/ so muͤssen wir doch weisen/ |
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| |
02 |
daß seinetwegen die Nacht--Feuer sind angezuͤndet |
|
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03 |
worden. |
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04 |
Eur. Jhr. Maj. haben uͤber dessen Schuld zu |
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05 |
sprechen/ und dessen Unschuld zu beschuͤtzen. |
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06 |
Mel. Diese Freyheit wird mir/ durch maͤchtige |
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07 |
Anklaͤger/ ziemlich gebunden. |
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| |
08 |
Eur. So stellet euch mit eurem Gefangenen ein. |
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| |
09 |
Anderer Handlung |
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| |
10 |
Achter Aufzug. |
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11 |
Die Vorigen. Die saͤmtlichen Bauern |
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12 |
bringen Archombrotus. |
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13 |
Dar. |
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| |
14 |
GNaͤdigster Herr Koͤnig/ da ist der arme Suͤnder. |
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15 |
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16 |
Telep. Wir bringen ihn so gut als wir ihn kriegen |
|
| |
17 |
kunten. |
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| |
18 |
Melamp. Er hat sich unserer Gesellschaft sehr |
|
| |
19 |
geschaͤmt. Nun mag er mit dem Koͤnige reden. |
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| |
20 |
Eurym. Wer ist dieser Gefangener? |
|
| |
21 |
Melamp. Es ist der Kerl; Wie heisst er denn? |
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| |
22 |
Eurym. Du hoͤrest/ daß ich selbst frage. |
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| |
23 |
Dar. Hui│ daß uns der Hencker beschmeisst/ wo |
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| |
24 |
wir den rechten nicht gebracht haben. |
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| |
25 |
Tel. Jch habe ihn nicht gekannt. |
|
| |
26 |
Eur. Jhr Unbekannter/ wer bringet euch in diese |
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| |
27 |
Gefangenschaft? |
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| |
[ Seite 94 ] |
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| |
01 |
Arch. Mein Herr/ ich bin noch nicht vier und |
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| |
02 |
zwanzig Stunden in dieser Jnsul gewesen/ so muß |
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| |
03 |
ich mich zu einer unverhofften Dienstbarkeit verstehen/ |
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| |
04 |
welche ich lieber mit dem Schwerdte abgewendet |
|
| |
05 |
haͤtte/ wofern ein solcher Hauffe meine Tapfferkeit |
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06 |
verdienete. |
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| |
07 |
Eur. Woher ist die Ankunft? |
|
| |
08 |
Arch. Jch bin aus Africa und komme in der Intention |
|
| |
09 |
hieher/ den Welt--beruͤhmten Hof des grossen |
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| |
10 |
Koͤniges zu sehen. Jm uͤbrigen habe ich Befehl |
|
| |
11 |
mein Geschlecht und meinen Namen zu verbergen. |
|
| |
12 |
Eur. Jhr unverstaͤndigen Leute/ so sehr als der |
|
| |
13 |
Gehorsam an euch moͤchte gelobet werden/ daß ihr/ |
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| |
14 |
auf Koͤniglichen Befehl/ nichts an gehoͤriger Anstalt |
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| |
15 |
habt ermangeln lassen: So sehr und noch vielmehr |
|
| |
16 |
mißfaͤllet uns die Thorheit/ die an einem vornehmen |
|
| |
17 |
Fremdlinge begangen wird. Machet ihn frey/ und |
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| |
18 |
stellet ihm das Gewehre wieder zu. |
|
| |
19 |
Dar. Mit Gunst/ Gnaͤdiger Herr; Meine Buͤrgerschaft |
|
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20 |
hat mich betrogen. |
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| |
21 |
Melamp. Und unsere Gemeine machte mich zum |
|
| |
22 |
Narren. |
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| |
23 |
Eur. Jhr habet eure Abfertigung. |
|
| |
24 |
[ Die Bauren gehen ab. ] |
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| |
25 |
Meleand. So ist euer Sinn gewesen/ unsern Hof |
|
| |
26 |
zu suchen? |
|
| |
27 |
Arch. Jhr. Maj. sehen einen gehorsamsten Diener/ |
|
| |
28 |
welcher sich zwar schaͤmet/ die erste Aufwartung/ |
|
| |
29 |
als ein Gefangener abzulegen: Doch ist dieses mein |
|
| |
30 |
Trost/ daß ich wuͤrdig bin/ des Herrn Poliarchi |
|
| |
31 |
Stelle zu vertreten. |
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| |
[ Seite 95 ] |
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01 |
Meleand. Alle vornehme Fremdlinge sind bey uns |
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02 |
sehr willkommen. |
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03 |
Archom. Meine unterthaͤnigste Liebe soll erweisen/ |
|
| |
04 |
daß/ zu Beschuͤtzung Eur. Koͤnigl. Maj. mein |
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| |
05 |
Schwerdt so fertig seyn soll/ als eines Eingebornen. |
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| |
06 |
Gestalt nochmahl zu der hohen Koͤnigl. Gnade meine |
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| |
07 |
Person demuͤthigst recommendiret wird. |
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| |
08 |
Mel. Die Person recommendiret sich selbst; |
|
| |
09 |
Und ich zweifele nicht/ es werde bald Gelegenheit geben/ |
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| |
10 |
die aufrichtige Freundschaft auf die Probe zu setzen. |
|
| |
11 |
Arch. Jch werde die Gnade ruͤhmen. |
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| |
12 |
[ Sie gehen ab. ] |
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| |
13 |
Anderer Handlung |
|
| |
14 |
Neundter Aufzug. |
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15 |
Selenisse, Argenis, Arsidas, |
|
| |
16 |
hernach Aspasia. |
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17 |
Arg. |
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| |
18 |
DEr artige Fremdling muß eines hohen Geschlechtes |
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| |
19 |
seyn. |
|
| |
20 |
Sel. Die Manier laͤsset sich nicht verbergen/ sonderlich |
|
| |
21 |
wenn sie durch Tugend vollkommen gemacht |
|
| |
22 |
wird. |
|
| |
23 |
Ars. Deßwegen muste er auch des Poliarchi Gedaͤchtnis |
|
| |
24 |
bey dem Koͤnige ruͤhmen/ ungeacht er befuͤrchten |
|
| |
25 |
kunte/ es moͤchte solches zu einer Ungnade |
|
| |
26 |
hinaus schlagen. |
|
| |
27 |
Sel. Der Himmel verleihe uns mehr solche Fremdlinge/ |
|
| |
28 |
welche den gebornen Sicilianern mit gutem |
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| |
29 |
Exempel vorgehen. |
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| |
[ Seite 96 ] |
|
| |
01 |
Asp. Ach Gnaͤdigste Prinzeßin/ Hr. Poliarchus |
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| |
02 |
ist gefangen. |
|
| |
03 |
Sel. Ja ja/ wir wissen es wohl; Er ist auch schon |
|
| |
04 |
wieder losgegeben. |
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| |
05 |
Asp. Es ist eine gewisse Zeitung. |
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| |
06 |
Arg. Auch eine alte Zeitung. |
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| |
07 |
Asp. Jch bringe was neues. |
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| |
08 |
Sel. Was wir schon vor Augen gesehen haben/ |
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| |
09 |
das ist numehr nichts neues. |
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| |
10 |
Asp. Jch bringe etwas/ das noch kein Mensch |
|
| |
11 |
von uns gesehen hat. |
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| |
12 |
Sel. So lasst doch hoͤren. |
|
| |
13 |
Asp. Hr. Poliarchus hat sich in einer Hoͤle verborgen; |
|
| |
14 |
Und weil er die Kleider allbereit verwechselt/ |
|
| |
15 |
ist die Vermuthung gewesen/ als wenn er unbekannter |
|
| |
16 |
Weise aus der Jnsul entweichen wolte. Nun |
|
| |
17 |
aber sind die Bauern zu schlimm gewesen/ daß er/ als |
|
| |
18 |
ein Gefangener/ zu dem Koͤnige begleitet wird. Jst |
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| |
19 |
dieses nicht etwas neues? |
|
| |
20 |
Arg. Wollet ihr keine bessere Sachen bringen/ |
|
| |
21 |
so moͤget ihr aus meinen Augen gehen. |
|
| |
22 |
Asp. Gnaͤdigste Prinzeßin -- -- |
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| |
23 |
Arg. Jch sage/ ihr sollet davon gehen. |
|
| |
24 |
[ Sie gehet. ] |
|
| |
25 |
Ars. Das Ungluͤck macht unsere List zu Schanden. |
|
| |
26 |
Sel. Und ich fuͤrchte einen ungluͤcklichen Ausgang. |
|
| |
27 |
Ars. Jhr. Hoheit die Prinzeßin muͤssen das euserste |
|
| |
28 |
versuchen. |
|
| |
29 |
Arg. Als die Zeitung von meines geliebtesten Poliarchi |
|
| |
30 |
Tode kam/ so wuste ich/ daß mir nichts an Leid |
|
| |
31 |
und Thraͤnen uͤbrig gelassen waͤren: Nun ich aber |
|
| |
[ Seite 97 ] |
|
| |
01 |
mein Leben mit seinem Stillschweigen verrathen koͤnte/ |
|
| |
02 |
so will ich darthun/ daß eine Tochter bey dem Vaͤterlichen |
|
| |
03 |
Richter--Stuhle was bitten darff. |
|
| |
04 |
Sel. Es ist viel/ wo Jhr. Maj. zu ungelegener Zeit/ |
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| |
05 |
ein solches Geheimnis erfahren sollen. |
|
| |
06 |
Arg. Und wenn ich verderben solte/ so will ich an |
|
| |
07 |
der Helfte meines Hertzens nicht untreu werden. |
|
| |
08 |
Ja wer den Spruch des Todes thun will/ der muß |
|
| |
09 |
mich zuvor zu dieser Strafe verdammen. [ gehet ab. ] |
|
| |
10 |
Ars. Wir koͤnnen den Zwang des gegenwaͤrtigen |
|
| |
11 |
Ungluͤcks nicht verhindern. |
|
| |
12 |
Sel. Und ich sehe mein Ungluͤck von weiten. |
|
| |
13 |
Anderer Handlung |
|
| |
14 |
Zehnder Aufzug. |
|
| |
15 |
Heraleon, Mopsus, Bavius. |
|
| |
16 |
Her. |
|
| |
17 |
ABer ich bitte. |
|
| |
18 |
Mops. Jch bin Stahl--Eisen--feste/ ich lasse mich |
|
| |
19 |
nicht uͤberbitten. |
|
| |
20 |
Bav. Und ich bitte/ der Ehrenveste Herr komme |
|
| |
21 |
doch mit. |
|
| |
22 |
Her. Jch muß sterben. |
|
| |
23 |
Mops. Wer schiert sich um dein Leben? |
|
| |
24 |
Bav. Stirb dreymahl/ wenn ich nur einmahl leben |
|
| |
25 |
bleibe. |
|
| |
26 |
Her. Jch bin unschuldig. |
|
| |
27 |
Mops. Mache mir den Herren Koͤnig nicht zum |
|
| |
28 |
Luͤgner. |
|
| |
[ Seite 98 ] |
|
| |
01 |
Bav. Ich daͤchte/ auf eine solche Fratze gehoͤrte sich |
|
| |
02 |
wohl eine Maulschelle. |
|
| |
03 |
Her. Ich will nimmermehr Poliarchus mehr |
|
| |
04 |
seyn; Lasset mich nur das einzige mahl lauffen. |
|
| |
05 |
Mops. Ja/ ja; Lauff nach deinem Gefallen/ aber |
|
| |
06 |
zum Herrn Koͤnige. |
|
| |
07 |
Her. Der laͤsst mich hencken. |
|
| |
08 |
Bav. So wollen wir zusehen. |
|
| |
09 |
Her. Wie kan ich denn mein Ungluͤck verhuͤten? |
|
| |
10 |
Mops. Mein Rath waͤre/ du machtest dich unsichtbar. |
|
| |
11 |
|
|
| |
12 |
Bav. Oder wo du hexen kanst/ so verwandele dich |
|
| |
13 |
in eine wilde Sau. |
|
| |
14 |
Her. Alle Barmhertzigkeit ist gestorben. |
|
| |
15 |
Mops. Drum bist du ein unbarmhertziger Flegel. |
|
| |
16 |
Bav. Aber deinetwegen hoffe ich ein barmhertziges |
|
| |
17 |
Trinckgeld. |
|
| |
18 |
Her. Ach ihr Leute/ sehet meinen Jammer an: |
|
| |
19 |
Jch muß lauffen/ ich muß mich verstecken/ ich muß |
|
| |
20 |
mich aus dem Loche reissen lassen; Und wer weiß/ wo |
|
| |
21 |
ich denen Raben muß zu Theil werden. |
|
| |
22 |
Mops. Fort/ fort│ Dein klaͤglich--thun koͤmmt zu |
|
| |
23 |
langsam. |
|
| |
24 |
Bav. Und wo dir was weh thut/ so koͤnnen wir |
|
| |
25 |
nicht davor. |
|
| |
[ Seite 99 ] |
|
| |
01 |
Anderer Handlung |
|
| |
02 |
Eilfter Aufzug. |
|
| |
03 |
[ Die mittelste Scene oͤffnet sich. ] |
|
| |
04 |
Meleander, Argenis, Archombrotus, |
|
| |
05 |
Eurymedes, Philippus |
|
| |
06 |
kommen heraus. |
|
| |
07 |
[ Die Bauern bleiben auf der Seite stehen. ] |
|
| |
08 |
Eur. |
|
| |
09 |
NUn ihr Leute/ was habt ihr vor einen Gefangenen? |
|
| |
10 |
|
|
| |
11 |
Her. ( kniet nieder. ) Da bin ich. |
|
| |
12 |
Eur. Wer bist du? |
|
| |
13 |
Her. Ich bin Poliarchus. |
|
| |
14 |
Eur. Was hast du gethan? |
|
| |
15 |
Her. Nichts auf der gantzen Welt: Nur dieses |
|
| |
16 |
ist mein Ungluͤcke/ daß ich Poliarchus bin. |
|
| |
17 |
Mel. Was ist dieses vor ein neuer Aufzug? |
|
| |
18 |
Eur. Dieser will mit gantzer Gewalt eine Person |
|
| |
19 |
bedeuten/ darzu er nicht geboren ist. |
|
| |
20 |
Mel. Soll dieser der gefangene Poliarchus seyn? |
|
| |
21 |
Eur. Die Leute sind zum andernmahle betrogen. |
|
| |
22 |
Her. Aber ich bin zehnmahl ungluͤcklich. |
|
| |
23 |
Phil. Ihr. Maj. tragen an dem guten Menschen |
|
| |
24 |
kein Mißfallen. Er ist an sich selbst ein ehrlicher |
|
| |
25 |
Mann/ der seinem Hauswesen/ mit iedermaͤnniglichem |
|
| |
26 |
Vergnuͤgen wohl vorstehet. Er ist leutselig in |
|
| |
27 |
Conversation/ geschickt in Handlungen/ und tuͤchtig |
|
| |
[ Seite 100 ] |
|
| |
01 |
genung/ den Namen eines rechtschaffenen Buͤrgers |
|
| |
02 |
davon zu tragen. |
|
| |
03 |
Mel. Die gegenwaͤrtige Schwachheit gibt ihm zu |
|
| |
04 |
solchen Lobe ein schlechtes Zeugnis. |
|
| |
05 |
Phil. Ja diesen einzigen Fehler hat er an sich/ daß |
|
| |
06 |
er nun etliche Monat daher die laͤcherliche Impression |
|
| |
07 |
bekommen/ als waͤre er Poliarchus; Damit darff |
|
| |
08 |
kein Mensch an diese Person gedencken/ so machet er |
|
| |
09 |
sich des Lobes mit sonderbarer Freude theilhaftig. |
|
| |
10 |
Mel. So wird er auch die Furcht mit dem Poliarcho |
|
| |
11 |
getheilet haben. |
|
| |
12 |
Phil. Ausser allem Zweifel hat er in unbekannten |
|
| |
13 |
Kleidern die Flucht genommen; Und derohalben ist |
|
| |
14 |
den einfaͤltigen Bauern die Suspicion eines betruges |
|
| |
15 |
erwachsen. |
|
| |
16 |
Mel. Es ist ein wunderbarer Zufall/ daß ein |
|
| |
17 |
Mensch zugleich soll klug und naͤrrisch seyn. |
|
| |
18 |
Phil. Es ist ein Zufall der gebrechlichen Menschheit: |
|
| |
19 |
Denn das Gehirn hat gewisse Kammern/ darin |
|
| |
20 |
die Bilder der Dinge aufgehoben und verschlossen |
|
| |
21 |
werden. Jn dem nun eine Kammer weitlaͤufftiger |
|
| |
22 |
ist/ als die andere/ so geschiehet es/ daß in der weitlaͤfftigen |
|
| |
23 |
allzuviel aufsteigender Unrath aus dem |
|
| |
24 |
Magen mit einlaͤufft/ und also der Wahrheit eine |
|
| |
25 |
Wolcke vorzeucht/ daß man sich selbst nicht erkennen/ |
|
| |
26 |
viel weniger das Falsche von dem Wahrhaftigen unterscheiden |
|
| |
27 |
kan. |
|
| |
28 |
Mel. Jhr Herren/ ihr sucht eure Sachen sehr |
|
| |
29 |
weitlaͤufftig. |
|
| |
30 |
Her. Ach gnaͤdigster Herr Koͤnig/ was habe ich |
|
| |
31 |
denn gethan/ daß ich sterben soll? Vergebet mir nur |
|
| |
[ Seite 101 ] |
|
| |
01 |
die einzige Suͤnde; Ich will gerne die Zeit meines |
|
| |
02 |
Lebens nicht mehr Poliarchus seyn. |
|
| |
03 |
Mel. Es ist genung geschertzet; Lasset den Kerlen |
|
| |
04 |
lauffen/ und gedencket/ daß mit einem Schertze/ da |
|
| |
05 |
was ernsthaftes drunter steckt/ itziger Zeit keinem |
|
| |
06 |
rechtschaffenen Patrioten gedienet ist. Es ist Zeit/ |
|
| |
07 |
daß die Supplicationes von den Unterthanen angenommen |
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08 |
werden. |
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09 |
Arg. Jch bin bereit/ mein heiliges Amt anzutreten. |
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10 |
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11 |
Mel. Wer von euch recommendiret wird/ der |
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12 |
soll gedoppelte Gnade zu gewarten haben. |
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13 |
[ Er gehet ab mit Archombr. und Phil. ] |
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14 |
Arg. Und die gedoppelte Gnade habe ich erfahren/ |
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15 |
als ich sahe/ daß mein Poliarchus noch in Sicherheit |
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16 |
war/ und daß ich meine Geheimniße nicht an den |
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17 |
Tag bringen durffte. [ gehet ab. ] |
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18 |
Eur. Jhr guten Leute/ ihr habt gefehlet; Doch eure |
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19 |
gute Intention soll mit steter Gnade erkennet |
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20 |
werden. |
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21 |
Mops. So darff ich wohl auf kein Geld warten/ |
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22 |
weil ich eine Sau gemacht habe. |
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23 |
Bav. Ja/ dießmahl sind wir spatziren gangen: |
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24 |
Denn wir verdienen kein Tagelohn. Gute Nacht/ |
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25 |
du guter Bruder; Verzeihe mir/ daß ich dich so weit |
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26 |
gefuͤhret habe/ da du hast koͤnnen mit dem Koͤnige |
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27 |
reden. |
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[ Seite 102 ] |
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01 |
Anderer Handlung |
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02 |
Zwoͤlfter Aufzug. |
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03 |
Heraleon, Nicopompus. |
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04 |
Nic. |
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05 |
JCh leide es nicht/ und wenn ich zu den Rebellen |
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06 |
solte uͤberlauffen. Ha│ soll mir ein Kerle an die |
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07 |
Seite gesetzet werden/ da ich mein Amt noch alleine |
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08 |
verrichten kan? Mit Spiessen/ Stangen und |
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09 |
Schwerdtern will ich drein schlagen. |
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10 |
Her. Ach wer sagt mir/ ob ich Poliarchus bin? |
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11 |
Nic. Ja/ ja/ das ist der Danck zu Hofe; Man |
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12 |
laͤsst sich dreissig Jahr zum Narren haben/ und hernach |
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13 |
soll ein ander so gut seyn/ der nicht einmahl bey |
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14 |
dem Pritschmeister vor Junge gedienet hat. |
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15 |
Her. Ich lieffe gerne weg/ aber jch falle andern |
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16 |
Verfolgern in die Haͤnde. |
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17 |
Nic. Hundert Tausend Verse langen nicht zu/ |
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18 |
wenn ich meine Kuͤnste zehlen solte/ davor mir der |
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| |
19 |
Hof gleichwohl das Gratial/ das ist/ einen Reichs--Thaler |
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20 |
vor eine Zeile/ mehrentheils noch schuldig ist; |
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21 |
Und ich soll mit meinem Schimpfe vor#lieb nehmen/ |
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22 |
den ich auf funffzig Tausend Ducaten schlagen |
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23 |
moͤchte. |
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24 |
Her. Doch courage│ Poliarchus, du bist ein |
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| |
25 |
Held; Deßwegen sind alle von dir geflohen/ weil |
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26 |
sie deine Macht gefuͤrchtet haben. Von meiner |
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| |
27 |
Hand sollen diejenigen sterben/ welche mich vor einen |
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28 |
Feind des Koͤniges achten. |
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| |
[ Seite 103 ] |
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01 |
Nic. Siehe da/ ist dieses der Hofe--Narr/ der heute |
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02 |
die Probe abgeleget hat. hoͤrt doch/ wer hat euch |
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03 |
hieher beruffen? |
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04 |
Her. Meine Tapfferkeit und die Verachtung des |
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05 |
menschlichen Geschlechtes. |
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06 |
Nic. Die Naturalia sind bey dem Schelmen gut. |
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07 |
Jch habe mich vorzusehen. |
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08 |
Her. Und wer mich vom Hofe treiben will/ der hat |
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| |
09 |
mit einem Helden zu thun. |
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10 |
Nic. Ey will mich der fremde Hahn von dem Miste |
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| |
11 |
beissen? Jch weiche nicht. |
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| |
12 |
Her. Jch begehre keine Besoldung. Jch lebe von |
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| |
13 |
meinen Mitteln; Und doch bin ich ein geheimer Rath. |
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14 |
Nic. Potz Tausend│ der Hof--Poete ist ihm zu |
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| |
15 |
schlecht; Er will auch den Rang uͤber mir haben. |
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| |
16 |
Her. Will er nun mein Verraͤther seyn/ so stehe |
|
| |
17 |
ich da: Jst er Lycogenes, so bin ich Poliarchus. |
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| |
18 |
Nic. Je du Staats--Bestie/ hat dich auch der Hofe--Geist |
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19 |
beschmissen? |
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| |
20 |
Her. Jch kan auch boͤse seyn. Sage an/ was |
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21 |
hast du an mir zu suchen? |
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| |
22 |
Nic. Geh fort; Jch will dich nicht suchen. |
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| |
23 |
Her. Und der Herr soll mich nicht finden. |
|
| |
24 |
Nic. Das will ich nicht thun. Fort/ fort/ zum |
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| |
25 |
Thore hinaus. |
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| |
26 |
Her. Poliarchus gehoͤret hieher. |
|
| |
27 |
Nic. So gehoͤrt die Maulschelle hieher. |
|
| |
28 |
[ schlaͤgt ihn. ] |
|
| |
29 |
Her. So wahr als ich Poliarchus bin/ ich will die |
|
| |
30 |
Maulschelle gedoppelt revengiren/ wenn ich den ersten |
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| |
31 |
Degen in die Haͤnde bekomme. [ gehet ab. ] |
|
| |
[ Seite 104 ] |
|
| |
01 |
Nic. Das heisst pro patria gefochten/ wenn man |
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| |
02 |
sich die unnuͤtzen Collegen vom Halse schafft. Nun |
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03 |
will ich des Tages drey hundert Verse mehr machen/ |
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04 |
da mir eine solche Sorge vom Hertzen geweltzet ist. |
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05 |
Anderer Handlung |
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06 |
Dreyzehnder Aufzug. |
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07 |
Eurymedes, Cleobulus, Argenis, |
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08 |
Selenisse. |
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09 |
Eur. |
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10 |
JHr. Hoheit werden sich gefallen lassen diesen |
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11 |
Sitz einzunehmen. |
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12 |
Arg. Es ist ein grosses/ daß ich den allgemeinen |
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13 |
Trost austheilen soll. |
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14 |
Cleob. Diejenige Person/ welche Jhr. Maj. am |
|
| |
15 |
nechsten ist/ muß auch der allgemeinen Liebe am ersten |
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| |
16 |
theilhafftig werden. |
|
| |
17 |
Arg. Wie aber/ wenn ich zu dem Wercke nicht |
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| |
18 |
kraͤftig genung waͤre? |
|
| |
19 |
Cleob. Die Gnade des Himmels macht Koͤnigl. |
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| |
20 |
Personen kraͤftig. |
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| |
21 |
Eur. Die Supplicanten sind vorhanden. Jst es |
|
| |
22 |
Jhr. Hoheit gefaͤllig/ so koͤnnen sie hieher gelassen |
|
| |
23 |
werden. |
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| |
24 |
Sel. Sie erwarten der Nachricht: Also wollen |
|
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25 |
wir alles in acht nehmen; Und ich will die Ehre haben/ |
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| |
26 |
ihr beyzustehen. |
|
| |
27 |
Arg. Jch bitte/ verlasst mich nicht. |
|
| |
[ Seite 105 ] |
|
| |
01 |
Sel. Jch bitte/ sie veraͤndere sich nicht. poliarchus |
|
| |
02 |
hat seine Gestalt veraͤndert/ und wuͤnschet |
|
| |
03 |
eine unveraͤnderte Liebste anzuschauen. |
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| |
04 |
Eur. Wolan ihr bedraͤngten Leute/ kommt etwas |
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| |
05 |
naͤher/ und lasset eure Noth diesen Koͤnigl. Haͤnden |
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06 |
befohlen seyn. |
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07 |
Anderer Handlung |
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08 |
Vierzehnder Aufzug. |
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| |
09 |
Die Vorigen/ hernach Nisus, Dares, lycisca |
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10 |
Bavius, Alopex, Telephes, |
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11 |
Mopsa, Melampus, Nicopompus, |
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| |
12 |
Poliarchus. |
|
| |
13 |
[ Argenis setzt sich. Nisus kniet. ] |
|
| |
14 |
JHr. Hoheit/ eine Klage wider unsere Officirer/ |
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| |
15 |
daß wir kein Geld kriegen. |
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| |
16 |
Arg. Es soll euch Recht widerfahren. |
|
| |
17 |
Nis. Und der Himmel wird die Gnade belohnen. |
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| |
18 |
[ gehen ab. ] |
|
| |
19 |
Dar. ( kniet. ) Gnaͤdige Jungfer/ eine Klage wider |
|
| |
20 |
unsere tumme Buͤrgerschaft. |
|
| |
21 |
Arg. Wer Recht hat/ soll Recht behalten. |
|
| |
22 |
Dar. Jch habe Recht uͤberley; So krieg ich noch |
|
| |
23 |
was heraus. [ gehet ab. ] |
|
| |
24 |
Lyc. ( kniet. ) Jungfer/ seyd ihr die Ober--Einnehmerin? |
|
| |
25 |
Da haͤtte ich einen Brief; Wo nicht Lateinisch |
|
| |
26 |
genung drinne steht/ so gebt meinem Advocaten |
|
| |
27 |
die Schuld. |
|
| |
[ Seite 106 ] |
|
| |
01 |
Arg. Jhr sollt kein Unrecht leiden. |
|
| |
02 |
Lyc. Ja wenn das wahr waͤre/ ich versoͤffe noch |
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| |
03 |
heute eine Kuh und drey Kaͤlber/ vor Freuden. [ g. a. ] |
|
| |
04 |
Bav. Gnaͤdigste Land--Richterin/ da will ich mich |
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| |
05 |
von meiner Frau scheiden/ und unser Richter/ der unbescheidene |
|
| |
06 |
Mann/ will nicht. Jm Briefe werdet ihr |
|
| |
07 |
sehen/ was er vor ein Mann ist. |
|
| |
08 |
Arg. Helfft euch nicht selber/ der Sache soll geholffen |
|
| |
09 |
werden. |
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| |
10 |
Bav. Jch begehre keine Huͤlffe: Helfft nur der |
|
| |
11 |
Frau nicht; Mit den andern will ich zu rechte kommen. |
|
| |
12 |
[ geht ab. ] |
|
| |
13 |
Alop. Da soll ich mehr Steuer geben/ als auf meinem |
|
| |
14 |
Gute stehet: Gnaͤdige Fr. Koͤnigin/ ich habe |
|
| |
15 |
keine Lust; Und das steht im Briefe geschrieben. |
|
| |
16 |
Arg. Jch will ihn annehmen. |
|
| |
17 |
Alop. Aber wenn ich den Brief gebe/ so gebe ich |
|
| |
18 |
keine Steuer. [ geht ab. ] |
|
| |
19 |
Teleph. Da wollen mir die Leute den Brantewein--Schanck |
|
| |
20 |
legen/ den ich doch de facto, mit |
|
| |
21 |
Recht und gutem Gewissen besitze. |
|
| |
22 |
Arg. Es wird sich weisen. |
|
| |
23 |
Teleph. Nur daß ich was gutes davon zu sehen |
|
| |
24 |
kriege. [ geht ab. ] |
|
| |
25 |
Mopsa. Da haben mir die Maͤuse meine Partisane |
|
| |
26 |
zerbissen/ und niemand will mir das Flicke--Lohn |
|
| |
27 |
geben/ drum muß ich klagen. |
|
| |
28 |
Arg. Jch will es geben; Nehmt euren Brief |
|
| |
29 |
wieder. |
|
| |
30 |
Mops. Je nu/ nu: Wenn die Briefe so kraͤftig |
|
| |
31 |
sind/ so kan ich sie wiedernehmen/ und ein andermahl |
|
| |
32 |
weiter brauchen. [ geht ab. ] |
|
| |
[ Seite 107 ] |
|
| |
01 |
Mel. Die Leute sprechen/ ich soll den Zettel hieher tragen. |
|
| |
02 |
Jhr werdet es wohl sehen/ daß ich mit meiner |
|
| |
03 |
ietzigen Obrigkeit nicht zufrieden bin. |
|
| |
04 |
Arg. Der andere Theil wird auch gehoͤret werden. |
|
| |
05 |
Mel. Jch wolte die Sache lieber zum Ende bringen/ |
|
| |
06 |
ehe der andere Theil darzu koͤmmt. Denn das |
|
| |
07 |
lose Maul ist zu groß bey ihm. Doch wenn es so seyn |
|
| |
08 |
soll/ so muß ich wohl warten. [ geht ab. ] |
|
| |
09 |
Nic. Jhr. Hoheit/ da ist eine Klage wider einen |
|
| |
10 |
Strassen--Raͤuber/ der mir eine Ohrfeige nicht bezahlen |
|
| |
11 |
will. |
|
| |
12 |
Arg. Jch will einen Bezahler schaffen. |
|
| |
13 |
Nic. Nein/ nein; Das ist eine Personal--Klage/ |
|
| |
14 |
da hat sich kein ander Mensch einzumischen. Jch |
|
| |
15 |
habe meine Acta publica uͤbergeben; Will sich kein |
|
| |
16 |
Richter finden/ so helffe ich mir selber. [ geht ab. ] |
|
| |
17 |
Poliarch. Ach│ wo ist meine Tapfferkeit/ da ich |
|
| |
18 |
einen Gang betreten soll/ darauf die geringsten Leute |
|
| |
19 |
von der Welt kuͤhne genung erscheinen? |
|
| |
20 |
Arg. Kommt her/ ihr lieber Mann. |
|
| |
21 |
Pol. ( kniet. ) Hier ist eine Klage. |
|
| |
22 |
Arg. Was haͤlt sie in sich? |
|
| |
23 |
Pol. Jch werde um Schuld gemahnet/ und ich |
|
| |
24 |
weis nichts davon. |
|
| |
25 |
Arg. So seyd ihr frey. |
|
| |
26 |
Pol. Meine Widersacher wollen nicht. |
|
| |
27 |
Arg. So wird der Richter wollen. |
|
| |
28 |
Pol. Der Richter wird mich aus dem Lande verbannen. |
|
| |
29 |
Der Brief ist Zeuge/ daß ich vor diesem Richter |
|
| |
30 |
so bald nicht erscheinen kan. |
|
| |
31 |
Eur. ( schlaͤgt ihn. ) Du ungehobelter Bauer/ |
|
| |
[ Seite 108 ] |
|
| |
01 |
solst du eine Koͤnigliche Person mit verdrießlichen |
|
| |
02 |
Worten aufhalten? |
|
| |
03 |
Pol. Jch leide meine Strafe/ daß ich nicht eher gewichen |
|
| |
04 |
bin. [ geht ab. ] |
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| |
05 |
Arg. Begegnet man den armen Supplicanten also? |
|
| |
06 |
Eur. Unhoͤfliche Leute werden dergestalt erinnert. |
|
| |
07 |
Arg. Und ich habe vor dießmahl gnung gethan? |
|
| |
08 |
( geht ab. ) |
|
| |
09 |
Sel. Wie so gar uͤbel lassen sich die Affecten verbergen│ |
|
| |
10 |
[ geht ab. ] |
|
| |
11 |
Eur. Die gute Prinzeßin wolte in ihrer Gegenwart |
|
| |
12 |
keinen Bauer strafen lassen. |
|
| |
13 |
Cleob. Dem Frauenzimmer steht die Barmhertzigkeit |
|
| |
14 |
zu. |
|
| |
15 |
Eur. Doch dieser Ort erfodert seinen Respect. |
|
| |
16 |
Cleob. Das erstemahl geht selten ohne Fehler ab. |
|
| |
17 |
Allein der Koͤnig kommt. Jst es moͤglich/ daß dieser |
|
| |
18 |
Verraͤther die Larve der Freundschaft vor sein boßhaftiges |
|
| |
19 |
Gesichte binden wird? |
|
| |
20 |
Eur. Ach wo die Laster herrschen/ da muͤssen tugendhafte |
|
| |
21 |
Diener seufzen. |
|
| |
22 |
Anderer Handlung |
|
| |
23 |
Funffzehnder Aufzug. |
|
| |
24 |
Meleander, Lycogenes, Archombrotus, |
|
| |
25 |
Eristhenes, Oloodemus, Eurymedes, |
|
| |
26 |
Cleobulus. |
|
| |
27 |
Mel. |
|
| |
28 |
VErflucht sey der Koͤnig/ der sein Reich mit Willen |
|
| |
29 |
verunruhiget. |
|
| |
[ Seite 109 ] |
|
| |
01 |
Lyc. Und verflucht sey der Unterthan/ der seines |
|
| |
02 |
Koͤniges Interesse verwarloset. |
|
| |
03 |
Mel. Also mag das Widerwaͤrtige Gluͤcke beschuldiget |
|
| |
04 |
werden/ wo etwas versehen ist. |
|
| |
05 |
Lyc. Der Himmel gebe uns die Gnade/ daß die |
|
| |
06 |
rechtschaffenen Freunde der allgemeinen Wohlfahrt |
|
| |
07 |
besser bekannt werden. |
|
| |
08 |
Mel. Niemand wird froͤlicher seyn/ als der Koͤnig |
|
| |
09 |
selbst. |
|
| |
10 |
Lyc. Und also bitte ich mit gebogenen Knien/ |
|
| |
11 |
Jhr. Maj. wollen so gnaͤdig seyn/ und denjenigen |
|
| |
12 |
Diener entschuldigen/ welcher durch fremde Verfolgung |
|
| |
13 |
zu einiger Extremitaͤt ist genoͤthiget worden. |
|
| |
14 |
Hier ist mein Gut und Blut/ wofern solches zum |
|
| |
15 |
Loͤse--Gelde der theuren Sicherheit kan angewendet |
|
| |
16 |
werden. |
|
| |
17 |
Mel. Stehet auf/ ihr habet die Gnade nicht verlohren/ |
|
| |
18 |
darum ihr Ansuchung thut. Der Himmel |
|
| |
19 |
helffe vielmehr/ daß bey der nachfolgenden Vertrauligkeit |
|
| |
20 |
die vergangenen Beschwerniße vergessen werden. |
|
| |
21 |
|
|
| |
22 |
Lyc. Jch wuͤnsche dieß; Und wer dem Koͤnigreiche |
|
| |
23 |
mit Treu zugethan ist/ der verrichte solchen Dienst |
|
| |
24 |
mit eben so guten Gemuͤthe. |
|
| |
25 |
Arch. Der Koͤnig lebe/ und alle Feinde verlieren |
|
| |
26 |
ihre Koͤpffe. |
|
| |
27 |
Eur. GOtt bringe den edlen Frieden in das Land |
|
| |
28 |
und ehrliche Diener an den Hof. |
|
| |
29 |
Eristh. Es lebe der Koͤnig/ damit treue Diener |
|
| |
30 |
leben moͤgen. |
|
| |
31 |
Cleob. Die Tugend triumphire/ und mache die |
|
| |
32 |
Laster zu Schanden. |
|
| |
[ Seite 110 ] |
|
| |
01 |
Olood. Es sterbe/ wer die gemeine Wohlfahrt |
|
| |
02 |
will sterben lassen. |
|
| |
03 |
Mel. Geliebter Eurymedes, der heutige Friedens--Tag |
|
| |
04 |
hat ungemeine Freude verdienet. Euch werden |
|
| |
05 |
die versoͤhnten/ oder daß ich recht sage/ die neu--erkannten |
|
| |
06 |
Gaͤste/ zu aller guten Bewirthung befohlen. |
|
| |
07 |
[ geht ab. ] |
|
| |
08 |
Eurymedes fuͤhrt sie hinein. |
|
| |
09 |
Erist. Das heisst/ sehende Leute bey der Nase herum gefuͤhret. |
|
| |
10 |
|
|
| |
11 |
Olood. Weil die Welt will betrogen seyn/ so ist |
|
| |
12 |
derjenige ein rechtschaffener Mann/ der nach ihren |
|
| |
13 |
Willen lebt. |
|
| |
14 |
Erist. Jch wolte gerne die guͤldene Schere auf |
|
| |
15 |
meine Unkosten machen lassen/ wenn nur iemand den |
|
| |
16 |
Weibischen Koͤnig zum Moͤnche scheren wolte. |
|
| |
17 |
Olood. Der heutige Friede ist so gut als eine guͤldene |
|
| |
18 |
Schere. |
|
| |
19 |
Erist. Und wo ich meine kuͤnftige Finanzen--Rechnung |
|
| |
20 |
bey Hn. Lycogenes ablegen soll/ so wolte ich |
|
| |
21 |
ihm noch die Kutte bezahlen. |
|
| |
22 |
Olood. Wehe dem Lande/ dessen Koͤnig zum |
|
| |
23 |
Weibe wird. |
|
| |
24 |
Erist. Dem Lande wird wiederum wohl seyn/ |
|
| |
25 |
wenn Lycogenes die Krone tragen wird. |
|
| |
26 |
Olood. Und wir werden lustig seyn/ wenn Lycogenis |
|
| |
27 |
Beylager vor sich gehen wird. |
|
| |
28 |
Erist. Nun wir halten uns auf. Die Friedens--Mahlzeit |
|
| |
29 |
muß verbracht werden. |
|
| |
30 |
Olood. Und der Freundschafts--Becher soll heimlich |
|
| |
31 |
herum gehen. [ gehen ab. ] |
|
| |
[ Seite 111 ] |
|
| |
01 |
Dritter Handlung |
|
| |
02 |
Erster Aufzug. |
|
| |
03 |
Arsidas, Timonides. |
|
| |
04 |
Arsid. |
|
| |
05 |
SO hat das Ungluͤcke gleichwohl uͤber dem |
|
| |
06 |
Edelsten von der Welt gebieten koͤnnen? |
|
| |
07 |
Tim. Jch war befehlicht/ im Namen der |
|
| |
08 |
Koͤniglichen Prinzeßin das kostbare Kleinod an den |
|
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09 |
Herrn Poliarchus zu uͤberbringen/ und ihm zu einiger |
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10 |
Versoͤhnung den Weg zu eroͤffnen/ als ich von |
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11 |
dem Schiffer selbst erfahren muste/ wie daß er der einzige |
|
| |
12 |
waͤre/ der sich vor dem Ungewitter haͤtte salviren |
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13 |
koͤnnen. |
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14 |
Ars. So ist das koͤstliche Armband nicht an den |
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15 |
rechten Ort geliefert worden? |
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16 |
Tim. Und das ungluͤckselige Geschencke muß wieder |
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17 |
zuruͤcke gehen. |
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18 |
Ars. Welche Thraͤnen werden genung seyn/ diesen |
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19 |
Tod zu bereuen? |
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20 |
Tim. Und wer wird so grausam seyn/ die Zeitung |
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21 |
bey der Koͤnigl. Prinzeßin zu uͤberbringen? |
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22 |
Ars. Nun wird der Koͤnig erst inne/ wohin er durch |
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23 |
seine Feinde ist verleitet worden. |
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24 |
Tim. Freylich waͤre diese Schifffart nachgeblieben/ |
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25 |
wofern ihn die grausame Nacht--Feuer nicht |
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26 |
erschrecket haͤtten. |
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27 |
Ars. Ach Argenis, Argenis, ich besorge/ dieser |
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[ Seite 112 ] |
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01 |
Schiffbruch wird mehr Todes--Faͤlle nach sich ziehen. |
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02 |
Wo Poliarchus nicht mehr lebt/ da wird Argenis |
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03 |
sterben wollen; Und diese Person darff nicht an das |
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04 |
Grab gedencken/ wofern der Koͤnig die kuͤnftigen |
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05 |
Jahre durch seine Regirung soll gluͤckselig machen. |
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06 |
Tim. Doch was ist dieses vor ein Wunderwerck? |
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07 |
Der todte Gelanor gehet am hellen Tage vor unsern |
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08 |
Augen. |
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09 |
Dritter Handlung |
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10 |
Anderer Aufzug. |
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11 |
Arsidas, Timonides, Gelanor. |
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12 |
Ars. |
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13 |
JSt es moͤglich/ daß ein Mensch in der See verderben/ |
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14 |
und gleichwohl den Hof in Sicilien besuchen |
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15 |
kan? |
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16 |
Gel. Es ist moͤglich/ wenn der Him̅el die Verzweifelung |
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17 |
selbst mit ungemeiner Huͤlffe beseliget. |
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18 |
Ars. Lebet Hr. Poliarchus noch? |
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19 |
Tim. Und hat der Schiffer uns mit falschen Erzehlungen |
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20 |
hinter das Licht gefuͤhret? |
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21 |
Gel. Der Schiffer hat nicht gelogen. |
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22 |
Tim. So muͤssen sie todt seyn. |
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23 |
Gel. Und wir leben noch. |
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| |
24 |
Tim. So koͤnnen todte Leute wieder aufstehen. |
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| |
25 |
Gel. Die Sache verhaͤlt sich also: Das Schiff |
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26 |
war von den Wellen dergestalt bezwungen/ daß wir |
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| |
27 |
keine andere Hoffnung hatten/ als etliche Stein--Klippen/ |
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| |
[ Seite 113 ] |
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01 |
welche im Meere einige Sicherheit wider |
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02 |
das Wasser/ nicht aber wider den Hunger versprachen. |
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03 |
Also liessen wir das Schiff mit dem ungluͤckseligen |
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04 |
Steuermanne/ welcher uns vor verdorben |
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05 |
hielt. |
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06 |
Ars. Hiermit werden Sie mit Adlers--Fluͤgeln uͤber |
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07 |
die See kommen seyn. |
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08 |
Gel. Wir haͤtten dergleichen Fuhrwerck von noͤthen |
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09 |
gehabt: Allein es kam ein Raub--Schiff/ welches |
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10 |
sich erbitten ließ uns anzunehmen. |
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11 |
Ars. Ein elender Wechsel von dem Hunger zur |
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12 |
Knechtschaft. |
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13 |
Gel. Es fehlte wenig/ so haͤtten wir das Elend der |
|
| |
14 |
Sclaverey auf dem Ruͤcken gefuͤhlet. Denn wir |
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15 |
hatten kaum den Fuß in das Schiff gesetzet/ so waren |
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| |
16 |
Sie mit ihren Ketten fertig. |
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| |
17 |
Ars. O verfluchte Grausamkeit/ wenn man ungluͤckliche |
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| |
18 |
Personen doppelt ungluͤcklich macht│ |
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19 |
Gel. Sie vermeinten/ als wuͤrden uns die Schwerdter |
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| |
20 |
im Wasser verrostet seyn. Doch als wir die |
|
| |
21 |
Ruͤcken zusammen kehrten/ musten Sie mit ihrem |
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| |
22 |
Blute bezahlen. Auch die gebundenen Gefangenen |
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23 |
selbst kamen zu rechter Zeit loß/ daß uns die Menge |
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| |
24 |
nicht uͤberwaͤltigen durffte. |
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| |
25 |
Ars. Was waren es vor Buben? |
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| |
26 |
Gel. Es befand sich ein kostbarer Schatz darbey/ |
|
| |
27 |
welcher vor etlichen Tagen der Koͤnigin in Mauritanien |
|
| |
28 |
war geraubet worden. Drum beschloß |
|
| |
29 |
Herr Poliarchus, die Reise dahin anzustellen/ und |
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| |
30 |
die Restitution mit eigenen Haͤnden zu verrichten. |
|
| |
[ Seite 114 ] |
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01 |
Ars. Die Tugend muß durch die gantze Welt bekannt |
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02 |
werden. |
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03 |
Gel. Jnzwischen befand sich einer unter den Todten/ |
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04 |
der einen Brief bey sich hatte/ von dem Rebellen |
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05 |
Lycogenes an den Herrn Poliarchus; Und weil |
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| |
06 |
der Bote nicht mehr reden kunte/ so blieben wir in |
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| |
07 |
heftigen Zweifel/ zumahl da Lycogenes den Koͤnig |
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08 |
beschuldigte/ als haͤtte er ihn mit einem vergifteten |
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09 |
Armbande betruͤgen wollen. |
|
| |
10 |
Tim. Das Armband ist wieder an seinen Ort geliefert; |
|
| |
11 |
Jch wuͤste nicht/ wer es solte vergiftet haben. |
|
| |
12 |
Ars. Und ich wuͤste vielweniger/ wo der Koͤnigs--Feind |
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13 |
hinter die listige Heimligkeit haͤtte kommen |
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14 |
sollen. |
|
| |
15 |
Gel. Der Koͤnig hat den Brief in den Haͤnden; |
|
| |
16 |
Und hier koͤmmt gleich die Fr. Hofemeisterin/ welche |
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| |
17 |
mir etwas sonderliches davon wird erzehlen koͤnnen. |
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| |
18 |
Ars. So wollen wir nicht hinderlich seyn. Wir |
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| |
19 |
sagen schoͤnsten Danck vor die Nachricht/ daher wir |
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| |
20 |
aus vielfaͤltigen Betruͤbniße sind erloͤset worden. |
|
| |
21 |
Dritter Handlung |
|
| |
22 |
Dritter Aufzug. |
|
| |
23 |
Gelanor, Selenisse. |
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| |
24 |
Gel. |
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| |
25 |
MEine Expedition ist schlecht gewesen. |
|
| |
26 |
Sel. Die gute Prinzeßin betruͤbt sich daruͤber. |
|
| |
[ Seite 115 ] |
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| |
01 |
Gel. Hr. Poliarchus schickte nichts als Lycogeenis |
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| |
02 |
Brief an den Koͤnig; Doch mit was vor hoͤnischen |
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03 |
und schimpflichen Worten mir begegnet worden/ |
|
| |
04 |
kan ich nicht beschreiben. |
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| |
05 |
Sel. Die Prinzeßin begehret/ es solle bey dem |
|
| |
06 |
Herrn Poliarchus verschwiegen werden. Jmmittelst |
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| |
07 |
ist die Sache schon heraus kommen. Lycogenes |
|
| |
08 |
hat das Gift bestellt/ und die verfluchten Giftmischer |
|
| |
09 |
Eristhenes und Oloodemus sind im Gefaͤngniße/ |
|
| |
10 |
nach erfolgter Bekaͤntnis/ unter der Hand |
|
| |
11 |
des Henckers gestorben. Also daß nunmehr der Koͤnig |
|
| |
12 |
ausser Verdacht lebet. |
|
| |
13 |
Gel. Jch werde mit dieser Zeitung zuruͤck reisen? |
|
| |
14 |
Belieben sie noch was zu bestellen/ so haben sie einen |
|
| |
15 |
getreuen Boten. |
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| |
16 |
Sel. Was die Prinzeßin muͤndlich befohlen hat/ |
|
| |
17 |
das wird in keine Vergessenheit gestellet werden. |
|
| |
18 |
Und hiermit eine gluͤckliche Reise. |
|
| |
19 |
Gel. Vielmehr ein gluͤckseliges Gedaͤchtnis vor |
|
| |
20 |
meinen Herrn. |
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| |
21 |
Dritter Handlung |
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22 |
Vierdter Aufzug. |
|
| |
23 |
Gelanor, Nicopompus. |
|
| |
24 |
Nic. |
|
| |
25 |
NUn bin ich in meinem Dienste recht bestaͤtiget. |
|
| |
26 |
Gel. Wie kommt mir dieser gute Freund in |
|
| |
27 |
den Weg? Man erfreuet sich seines Wohlstandes. |
|
| |
[ Seite 116 ] |
|
| |
01 |
Nic. Ach mein Patron/ ich erfreue mich/ daß sich |
|
| |
02 |
iemand uͤber meine Wenigkeit erfreuen will. |
|
| |
03 |
Gel. Vornehme Leute haben mehr als diese geringe |
|
| |
04 |
Aufwartung verdienet. Doch was gibt es itzo |
|
| |
05 |
zu verrichten? |
|
| |
06 |
Nic. Herr Poliarchus hat ein Huͤndgen zuruͤcke gelassen; |
|
| |
07 |
Dieses hat vorgestern sollen in die Wochen |
|
| |
08 |
kommen/ und ist gestorben. Da ich nun merckte/ |
|
| |
09 |
als waͤre die Koͤnigliche Prinzeßin gar ungeduldig |
|
| |
10 |
druͤber/ weil sie vielleicht ein Junges darvon verhoffte/ |
|
| |
11 |
so habe ich ihr zum Troste ein Hertz--brechendes |
|
| |
12 |
Grabe--Lied aufgesetzet. |
|
| |
13 |
Gel. Kan man des umsonst hoͤren? |
|
| |
14 |
Nic. O ja/ wenn es vornehme Leute begehren. |
|
| |
15 |
Denn gegen irdisch--gesinnte Geister geht man etwas |
|
| |
16 |
stoͤltzer. |
|
| |
17 |
Gel. Nun wie faͤngt es an? |
|
| |
18 |
Nic. Es gehet auf eine sehr andaͤchtige Melodey / |
|
| |
19 |
wie etwan vor diesen gesungen ward: |
|
| |
20 |
Da sitz ich in dem Loche; |
|
| |
21 |
Ach saͤß ich bey dem Koche/ |
|
| |
22 |
Und haͤtte Schoͤpfen--Braten/ |
|
| |
23 |
So waͤre mir gerathen. |
|
| |
24 |
Gel. Die Andacht laͤsset sich nicht verbergen. |
|
| |
25 |
Nic. Sonderlich wenn Hunds--Personen darzwischen kommen. |
|
| |
26 |
Doch ich werde singen. |
|
| |
27 |
[ Er singet/ nach der Melodey: Verzeihe |
|
| |
28 |
mir Clorinde. ] |
|
| |
[ Seite 117 ] |
|
| |
23 |
Gel. Jch erfreue mich uͤber dem Grabe--Liede. |
|
| |
24 |
Nic. Das ist ein schlecht Zeichen vor meine |
|
| |
25 |
Thraͤnen. |
|
| |
26 |
Gel. Wo solche Lieder im Schwange gehen/ da |
|
| |
27 |
muß Friede und gute Zeit im Lande seyn. |
|
| |
28 |
Nic. Der ist ein Narr/ der sich alles Ungluͤck laͤsset |
|
| |
29 |
zu Hertzen gehen. |
|
| |
[ Seite 118 ] |
|
| |
01 |
Gel. Nun wolan/ meine Reise will nicht auf mich |
|
| |
02 |
warten. Lebt gesund/ und macht viel lustige Lieder. |
|
| |
03 |
Nic. Ja auf eure Hochzeit will ich die Braut--Suppe |
|
| |
04 |
machen. Unterdessen reiset gesund/ damit die |
|
| |
05 |
Braut nicht uͤber die Strassenraͤuber weinen darf. |
|
| |
06 |
Dritter Handlung |
|
| |
07 |
Fuͤnffter Aufzug. |
|
| |
08 |
Meleander, Eurymedes, Cleobulus, |
|
| |
09 |
Timonides. |
|
| |
10 |
Mel. |
|
| |
11 |
SO haben die meineydigen Buben den Lohn |
|
| |
12 |
ihres Beginnens empfangen. Und so muß der |
|
| |
13 |
tapffere Poliarchus mit seiner Unschuld bekannt werden. |
|
| |
14 |
Ach Lycogenes, wird meiner Sanftmuth |
|
| |
15 |
hierin so gedanckt/ daß ich nun meine Waffen gegen |
|
| |
16 |
diejenigen wenden soll/ der bloß durch meine Guͤtigkeit |
|
| |
17 |
zu solchen Kraͤften gestiegen ist│ Doch ihr |
|
| |
18 |
Freunde/ ist es moͤglich/ daß wir uns zu einem geschwinden |
|
| |
19 |
Kriege schicken sollen? |
|
| |
20 |
Eur. Jhr. Maj. der Feind steht vor dem Thore; |
|
| |
21 |
Und wo wir nicht die euserste Sclaverey erfahren sollen/ |
|
| |
22 |
so muͤssen wir zur eusersten Nothwehre greiffen. |
|
| |
23 |
Cleob. So weit ist es kommen/ daß auch dem |
|
| |
24 |
Eydschwure nicht mehr zu trauen ist. Allein der |
|
| |
25 |
Himmel wird Richter seyn/ wie hoch dieser Meineyd |
|
| |
26 |
soll bestrafft werden. |
|
| |
27 |
Tim. Eben dieses giebet uns eine gerechte Sache/ |
|
| |
[ Seite 119 ] |
|
| |
01 |
und durch die gerechte Sache wird der Muth bey allen |
|
| |
02 |
Soldaten verdoppelt. |
|
| |
03 |
Mel. Wenn aber die Paͤsse verschlossen sind/ daß |
|
| |
04 |
sich die Sicherheit kaum bis an das Thor erstrecket/ |
|
| |
05 |
so werden wir wenig Soldaten haben/ welche den |
|
| |
06 |
Muth werden verdoppeln koͤnnen. |
|
| |
07 |
Eur. Dieses waͤre das erste Exempel nicht/ daß ein |
|
| |
08 |
geringer Hauffen der groͤsten Armée waͤre gewachsen |
|
| |
09 |
gewesen. |
|
| |
10 |
Cleob. Und waruͤm wollen wir eine Schlacht |
|
| |
11 |
wagen/ da wir doch dem Gluͤcke noch etliche Tage |
|
| |
12 |
zusehen koͤnnen? Ehe der Feind uͤber die Mauren |
|
| |
13 |
springet/ so werden sich unterschiedliche Freunde des |
|
| |
14 |
Koͤniglichen Thrones anmelden. |
|
| |
15 |
Tim. Und wer weis/ ob die Goͤttliche Direction |
|
| |
16 |
nicht den Segen gibt/ daß gegen die Meineydigen |
|
| |
17 |
mit einer gluͤckseligen Krieges--List procediret wird. |
|
| |
18 |
Dritter Handlung |
|
| |
19 |
Sechster Aufzug. |
|
| |
20 |
Die Vorigen/ und Hierolander. |
|
| |
21 |
Hier. |
|
| |
22 |
JHr. Koͤnigl. Maj. die Koͤnigliche Prinzeßin |
|
| |
23 |
laͤsset sich unterthaͤnig befehlen/ und vermeldet |
|
| |
24 |
zur Nachricht/ daß wir nothwendig verloren seyn. |
|
| |
25 |
Mel. Der Feind vor dem Thore soll die Maͤnner |
|
| |
26 |
noch in keine Furcht jagen. Saget dem Frauenzimmer/ |
|
| |
27 |
es solle gutes Muths seyn. |
|
| |
[ Seite 120 ] |
|
| |
01 |
Hier. Ach den Feind vor dem Thore haben wir |
|
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02 |
langezeit verachten koͤnnen: Allein was sollen wir |
|
| |
03 |
nun angeben/ da unser Hafen zur See/ mit einer unbekannten |
|
| |
04 |
Kriegs--Flotte gesperret wird? |
|
| |
05 |
Mel. Wie kan das moͤglich seyn? |
|
| |
06 |
Hier. Der Augenschein gibt es; Und ehe die Koͤnigl. |
|
| |
07 |
Schiffe zusammen kommen/ so werden wir der |
|
| |
08 |
meineydigen Grausamkeit aufgeopffert seyn. |
|
| |
09 |
Mel. Jch sehe/ mein Ungluͤck kommt aufs hoͤchste/ |
|
| |
10 |
das heisst/ ich soll mein Ungluͤck bald beschliessen. Doch |
|
| |
11 |
wehe meiner geliebtesten Argenis, welche nothwendig |
|
| |
12 |
dem stoltzen Uberwinder zu einer schimpflichen |
|
| |
13 |
Beute wird folgen muͤssen. |
|
| |
14 |
Dritter Handlung |
|
| |
15 |
Siebender Aufzug. |
|
| |
16 |
Die Vorigen und Archombrotus. |
|
| |
17 |
Arch. |
|
| |
18 |
JHr. Maj. an welcher Seite soll ich mein Blut |
|
| |
19 |
aufopffern? Soll ich dem Feinde zur See oder |
|
| |
20 |
zu Lande begegnen? |
|
| |
21 |
Mel. Ach tapfferer Fremdling/ das Ungluͤck ist hoͤher/ |
|
| |
22 |
als unsere Tugend; Und nach dem die Feinde |
|
| |
23 |
mir auch die Flucht aus der Jnsul verschliessen wollen/ |
|
| |
24 |
so muß ich meinen Zepter einer grausamen Nothwendigkeit |
|
| |
25 |
unterwerffen. |
|
| |
26 |
Arch. So lange mir das ungluͤckselige Messer |
|
| |
27 |
nicht in dem Hertzen steckt/ so lange will ich bekennen/ |
|
| |
[ Seite 121 ] |
|
| |
01 |
daß ich vor die Sicilianische Krone meinen Arm gebrauchen |
|
| |
02 |
will. |
|
| |
03 |
Eur. Aber woher ist die Flotte kommen? |
|
| |
04 |
Hier. Daß Lycogenes bishero nach der See--Macht |
|
| |
05 |
wenig gefraget habe/ solches wissen wir alle; |
|
| |
06 |
Gleichwohl aber koͤnte sich ein auswertiger Potentate |
|
| |
07 |
zu einem gefaͤhrlichen Buͤndniße verstanden |
|
| |
08 |
haben. |
|
| |
09 |
Cleob. So moͤchte man nach der Ankunft forschen |
|
| |
10 |
lassen. Soll man verderben/ so bleibt doch der |
|
| |
11 |
Ruhm/ daß man die Gegenwart des letzten Uberwinders |
|
| |
12 |
mit unerschrockenen Gesichte angenommen |
|
| |
13 |
hat. |
|
| |
14 |
Tim. Vielleicht wird es der Abschickung nicht beduͤrffen/ |
|
| |
15 |
weil diese fremde Person uns ohne Zweifel |
|
| |
16 |
dieses Geheimnis eroͤffnen wird. |
|
| |
17 |
Dritter Handlung |
|
| |
18 |
Achter Aufzug. |
|
| |
19 |
Die Vorigen und Sitalces. |
|
| |
20 |
Sit. |
|
| |
21 |
EUr. Koͤnigl. Maj. befiehlet sich der Durchlauchtigste |
|
| |
22 |
Herr Radirobanes. Koͤnig in Sardinien / |
|
| |
23 |
und nach dem das Geschrey bis dorthin erschollen/ |
|
| |
24 |
welcher massen durch meineydige Unterthanen die |
|
| |
25 |
Autoritaͤt des Koͤniges gebrochen/ die Ruhe des gantzen |
|
| |
26 |
Reiches zerruͤttet/ und allen benachbarten Koͤnigen |
|
| |
27 |
ein gefaͤhrlich Exempel uͤberlassen werde. So |
|
| |
[ Seite 122 ] |
|
| |
01 |
haben hoͤchst--gedachte Jhr. Koͤnigl. Maj. von Sardinien |
|
| |
02 |
sich ihrer hohen Pflicht erinnert/ und offeriren |
|
| |
03 |
dero gesamte Krieges--Flotte wider die unrechtmaͤssigen |
|
| |
04 |
Rebellen/ dergestalt/ daß sie auch diesen Augenblick |
|
| |
05 |
nicht allein Eur. Maj. zusprechen/ sondern |
|
| |
06 |
auch den Krieg selbst fortzusetzen verlangen. |
|
| |
07 |
Mel. Jst dieser getreue Nachbar/ dieser alte Freund |
|
| |
08 |
und Bruder hier? Jch werde Gelegenheit nehmen |
|
| |
09 |
ihm auf der Flotte zu begegnen. |
|
| |
10 |
Sit. Jhr. Maj. haben keine Ursache sich einiger |
|
| |
11 |
Muͤhwaltung anzunehmen; Der Durchl. Koͤnig von |
|
| |
12 |
Sardinien wird mit freundlicher Begruͤssung zuvor kommen. |
|
| |
13 |
|
|
| |
14 |
Mel. So muß Anstalt gemachet werden/ daß ein |
|
| |
15 |
so vortrefflichen Gast empfangen wird. |
|
| |
16 |
Dritter Handlung |
|
| |
17 |
Neundter Aufzug. |
|
| |
18 |
Die Vorigen/ Radirobanes, Virtiganes, |
|
| |
19 |
Cornius, Libachanes. |
|
| |
20 |
Rad. |
|
| |
21 |
ES ist keiner Anstalt von noͤthen/ wenn ein Bruder |
|
| |
22 |
zu dem andern koͤmmt/ oder wo ein Sohn |
|
| |
23 |
bey dem Herrn Vater die Schuldigkeit ableget. |
|
| |
24 |
Durchlauchtigster Koͤnig/ hier ist die Macht von |
|
| |
25 |
Sardinien / davor Siciliens Feinde der Majestaͤt |
|
| |
26 |
zur Vergnuͤgung erzittern sollen. |
|
| |
27 |
Mel. Ach mein Bruder/ wo haͤtte ich mich einer |
|
| |
28 |
so unverhofften und gleichwohl hoͤchst--angenehmen |
|
| |
29 |
Ankunft getroͤsten sollen│ |
|
| |
[ Seite 123 ] |
|
| |
01 |
Rad. Ein Koͤnig wird an seiner eigenen Majestaͤt |
|
| |
02 |
untreu/ wenn er die Unterdruͤckung einer benachbarten |
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03 |
Majestaͤt mit geduldigen Augen ansehen kan. |
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04 |
Mel. Jch erkenne die Schickung des gnaͤdigen |
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05 |
Himmels/ und preise die Freundschaft/ welche mit |
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06 |
ewiger Danckbarkeit soll bedienet werden. |
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07 |
Rad. Wo man durch hohe Schuld angetrieben |
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08 |
wird/ da bedarf man keiner Danckbarkeit. |
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09 |
Mel. So wird mein geliebtester Herr Bruder so |
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10 |
guͤtig seyn/ und befehlen/ wie in unserm Schlosse |
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11 |
demselben solle aufgewartet werden. |
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12 |
Rad. Jch lebe hier unter fremden Befehle. Doch |
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13 |
wenn ich die Freyheit nehmen soll etwas zu bitten/ so |
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14 |
moͤchte ich zuvor die Feinde gestrafft haben/ ehe von |
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15 |
dergleichen annehmlicher Bewirthung geredet wird. |
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16 |
Mel. Die Feinde sollen uns nicht entlauffen. |
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17 |
Rad. Doch es ist besser/ wenn sie unversehens ihren |
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18 |
Raͤcher finden. Das Geschrey unserer Ankunft |
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19 |
kan nicht verborgen seyn; Und wo die Furcht die |
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20 |
meineydigen Buben Landfluͤchtig macht/ so werden |
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21 |
wir dasjenige mit spoͤttilichen Verdrusse langsam suchen/ |
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22 |
welches wir anitzo beysammen haben. |
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23 |
Mel. Mein Hr. Bruder verschone seiner eigenen |
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24 |
Person; Es werden sich schon Leute finden/ welche |
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25 |
diesen Rebellen die Straffe ankuͤndigen sollen. |
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26 |
Rad. Jch will in diesem Stuͤcke keinen Argwohn |
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27 |
der geringsten Furcht blicken lassen. Meine Soldaten |
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28 |
sind also gewohnet: Sie streiten am besten/ |
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29 |
wenn sie mich zum Vorgaͤnger haben. |
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30 |
Mel. Jch darff so einem vornehmen Gaste in dem |
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31 |
ersten Verlangen nicht widerstreben. [ sie gehn ab. ] |
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[ Seite 124 ] |
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01 |
Dritter Handlung |
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02 |
Zehnder Aufzug. |
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03 |
Archombrotus. |
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04 |
WElche Furie hat diesen ungebetenen Gast in Silien |
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05 |
gefuͤhret? Jch meinete/ es wuͤrde mir nichts |
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06 |
im Wege stehen/ bey der Wunder--schoͤnen Argenis |
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07 |
die Liebe zu erwerben/ nach dem Poliarchus die Flucht |
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08 |
ergriffen/ und Lycogenes durch den neuen Aufstand |
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09 |
einen allgemeinen Haß verdienet hat. Aber |
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10 |
ach/ wie bin ich betrogen│ Entweder Argenis ist |
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11 |
nicht schoͤne genung/ oder sie muß auch von andern |
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12 |
Augen erkennet werden/ das heisst/ ich werde alle Tage |
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13 |
mit andern Feinden zu eifern und zu streiten haben. |
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14 |
Denn warum solte der Koͤnig in Sardinien so gar |
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15 |
mit ungemeiner Freundschaft erscheinen/ wenn er |
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16 |
nicht durch diese Wohlthat die vornehmste Prinzeßin |
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17 |
von der Welt erkauffen wolte? Doch ist er tapffer/ |
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18 |
so hab ich ein Hertze/ das Keinem nachgibet. Vielleicht |
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19 |
wird mir das Gluͤcke noch heute gewogen seyn/ |
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20 |
daß ich vor einem andern den Zierdanck erhalten kan. |
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21 |
Dritter Handlung |
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22 |
Eilfter Aufzug. |
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23 |
Aspasia, Pollio. |
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24 |
Asp. |
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25 |
ES ist ja unmoͤglich/ daß ihr in den Krieg ziehen |
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26 |
wollt? |
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[ Seite 125 ] |
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01 |
Poll. Wer nicht bey Zeiten anfaͤnget/ der kan |
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02 |
nichts verbringen. Bin ich im zehnden Jahre ein |
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03 |
Musqvetirer/ im eilften ein Corporal/ im zwoͤlften ein |
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04 |
Faͤhnrich/ so kan ich im vier und zwanzigsten ein General |
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05 |
seyn; Und gedenckt nur/ was ich hernach vor |
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06 |
eine Liebste kriegen kan/ und was vor ein koͤstliches |
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07 |
Beylager von mir/ als einem General/ wird koͤnnen |
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08 |
angestellet werden. |
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09 |
Asp. Mein liebstes Kind/ unzeitige Fruͤchte verderben |
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10 |
gerne. |
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11 |
Poll. O nein/ wenn sie nur der Art seyn. Bin ich |
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12 |
keine Michels--Birne/ so bin ich eine Muscateller--Birne. |
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13 |
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14 |
Asp. Aber ein General muß groß seyn: Wo wird |
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15 |
sich eine Michels--Birne/ ein grosse Pergemotte/ ein |
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16 |
Annaberger--Apffel oder sonst was rechtes/ von einer |
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17 |
lumpichten Muscateller--Birne commendiren |
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18 |
lassen? |
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19 |
Poll. Mit dem Commando heisst es: Wilt du |
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20 |
nicht/ so must du. |
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21 |
Asp. Es ist gar klug geredt. Aber es sollen auch |
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22 |
rechte Leute commendiren. |
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23 |
Poll. Lasst mich nur vier und zwanzig Jahr alt |
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24 |
werden/ ihr sollt sehen/ ob ich will ein Lincker seyn. |
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25 |
Asp. Doch wenn alle Leute nur an den Krieg gedaͤchten/ |
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26 |
wo bliebe das arme Frauenzimmer? Jch |
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27 |
meinte/ es waͤre besser/ wenn solche liebe Kinder zu |
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| |
28 |
Hause blieben/ und in guter Gesellschaft die Zeit passirten. |
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29 |
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30 |
Poll' Kan ich davor/ daß ihr uns in den Krieg nicht |
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31 |
das Geleite gebt? |
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[ Seite 126 ] |
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01 |
Asp. Wir sehen nicht gerne todte Leute. |
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02 |
Poll. So muß ich nur Abschied nehmen/ und die |
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03 |
todten Leute allein ansehen. |
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04 |
Asp. Jch bitte nur vor diesen Tag. |
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05 |
Poll. Die Kurtze Zeit will ich noch verziehen/ darnach |
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06 |
laß ich mich nicht aufhalten. |
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07 |
Asp. Ein Tag ist nicht lang; Jch will nur die |
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08 |
Butter--Semmeln bestellen/ daß etwas fertig ist/ damit |
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09 |
die Feinde wider euch schiessen koͤnnen. |
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| |
10 |
Poll. Wollt ihr hoͤnisch seyn/ so wird mirs auch |
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11 |
nicht an Worten fehlen. |
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12 |
Dritter Handlung |
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13 |
Zwoͤlfter Aufzug. |
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14 |
Lycogenes, Anaximander, Menocritus. |
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15 |
Lyc. |
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16 |
WAs bedeutet dieses thumme Rasen? und wer |
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17 |
machet die Belagerten so kuͤhne/ daß sie uns selbst |
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18 |
zum Streite ausfodern? |
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19 |
Anax. Wer sterben soll/ der thut am besten/ wenn |
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20 |
er den Tod selber sucht. |
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21 |
Men. Und wer Lust hat auf die gluͤckselige Partey |
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| |
22 |
zu treten/ der wird hierdurch Gelegenheit bekommen. |
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23 |
Lyc. Es mag geschehen/ warum es will/ so muͤssen |
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| |
24 |
wir gedencken/ daß zwey tapffere Personen die Rache |
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| |
25 |
von uns erfodern. Ach soll ein redlicher Minister, |
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| |
26 |
ein hoher Præsidente bey den Finanzen deßwegen |
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| |
27 |
sterben/ daß er mich nicht vor einen Feind des |
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| |
[ Seite 127 ] |
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01 |
Vaterlandes halten will? und daß er denjenigen |
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02 |
widersteht/ welche das allgemeine Verderben suchen? |
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03 |
Und soll die gerechte Sache nicht einen bessern Ausgang |
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04 |
gewinnen│ |
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05 |
Anax. Die Wachsamkeit ist uns von noͤthen; |
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06 |
Wir haben gute Raison die Koͤnigs--Sclaven in ihrem |
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07 |
Loche zu verachten. Allein sie moͤchten noch zu |
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08 |
guter Letzt einer gluͤckseligen Lust gebrauchen/ darbey |
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09 |
unsere Victorie auf etliche Monat aufgeschoben |
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10 |
wuͤrde. |
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11 |
Men. Das gantze Koͤnigreich stehet gleichsam auf |
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| |
12 |
der Hut/ und nach dem heutigen Lauffe wird unsere |
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13 |
Parthey entweder schwach oder starck werden. |
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14 |
Anax. Jtzo fraget man nicht/ wer den Sieg in |
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| |
15 |
den Haͤnden hat: Sondern/ wer so geschickt ist/ daß |
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| |
16 |
er bald gewinnen kan. |
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17 |
Men. Es ist wahr unter einem langsamen und |
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18 |
furchtsamen Koͤnige verdienet die tapffere Eylfertigkeit |
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19 |
eine hohe Verwunderung. |
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20 |
Lyc. Wolan so verrichtet das eurige/ und gedencket/ |
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| |
21 |
daß ich von dem Meinigen nichts abfodern werde/ |
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| |
22 |
welches nicht von mir gedoppelt geschehen ist. |
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| |
23 |
Anax. Die Soldaten sind nach der Beute begierig/ |
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| |
24 |
und sie werden mehr des Zuͤgels als der Sporen |
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25 |
beduͤrffen. |
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| |
26 |
Men. Dannenhero wird das Gluͤcke desto angenehmer |
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| |
27 |
seyn/ weil sich das Opffer selbst dem Schlaͤchter |
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| |
28 |
offeriren will. |
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29 |
Lyc. Wer heute sieget/ der soll morgen bey dem |
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| |
30 |
Koͤniglichen Purpur am nechsten stehen. |
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[ Seite 128 ] |
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| |
01 |
Dritter Handlung |
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02 |
Dreyzehnder Aufzug. |
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03 |
Melampus, Lycisca, Attalus. |
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| |
04 |
Melamp. |
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05 |
JCh halte der Schwarm geht nun an/ daß wir |
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06 |
Bauren in das Gedraͤnge kommen/ und nicht |
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07 |
wissen/ in welch Fuchs--Loch wir kriechen sollen. |
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08 |
Lyc. Eine Part muß dran; Und wenn ich nur |
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| |
09 |
wuͤste/ welche gewinnen wolte/ so waͤre mirs ein leichtes/ |
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10 |
daß ich etliche hundert Duzend auf mein Hertze |
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11 |
naͤhme. |
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12 |
Mel. O wer weis/ ob es der Herren ihr Ernst ist/ |
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13 |
daß sie einander wollen todt haben; Sie machen |
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14 |
nur solch Lermen/ daß sie die Bauren desto besser |
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15 |
drillen. |
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16 |
Lyc. Es ist wahr: Jn Friedens--Zeiten geben |
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| |
17 |
wir nicht gerne einen Groschen/ und im Kriege lassen |
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18 |
wir uns gantze Thaler aus der Haut schneiden. |
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| |
19 |
Att. Nun wie stehts/ ist die Schantze fertig? |
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| |
20 |
Greifft zu/ oder schafft uns andere Gehuͤlffen: Das |
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| |
21 |
Werck muß bey Ankunft des Koͤniges im Stande |
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| |
22 |
seyn/ oder das gantze Dorf wird gehangen. |
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| |
23 |
Mel. Jch habe meinen Fleck gemacht. |
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| |
24 |
Lyc. Und mein Bißgen Dreck liegt auch an dem |
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| |
25 |
rechten Orte. |
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| |
26 |
Att. Es heisst nicht so: Ein iedweder Bauer stehet |
|
| |
27 |
vor das gantze Dorf. |
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| |
[ Seite 129 ] |
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| |
01 |
Mel. Hundert ehrliche Leute koͤnnen die Schuld |
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| |
02 |
nicht tragen/ wenn zwanzig Schelmen das Jhrige |
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03 |
versaͤumen. |
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| |
04 |
Att. Es wird einem so wohl als dem andern befohlen. |
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| |
05 |
|
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06 |
Dritter Handlung |
|
| |
07 |
Vierzehnder Aufzug. |
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08 |
Die Vorigen/ Archombrotus, Hanno. |
|
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09 |
Arch. |
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10 |
NUn wie stehts/ ihr ehrlichen Bruͤder? Es ist an |
|
| |
11 |
dem/ daß die Trouppen an#einander gerathen sollen; |
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| |
12 |
Machet euch fort und lasset euch anweisen. |
|
| |
13 |
Att. Die Bauren werden nicht viel nuͤtze seyn. |
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| |
14 |
Arch. Jch will Mittel schaffen/ daß dem Feinde |
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| |
15 |
bange genung werden soll. Folget mir nach/ und verdoppelt |
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| |
16 |
das Schrecken/ das ich angefangen habe. |
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| |
17 |
Han̅. ( fuͤhret ihn auf die Seite. ) Ach mein |
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| |
18 |
Herr/ wie so unnoͤthig ist dieser Gang│ |
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| |
19 |
Arch. Und wie so schlecht seyd ihr meinetwegen |
|
| |
20 |
berichtet. |
|
| |
21 |
Han̅. Die Koͤnigliche Fr. Mutter hat itzund ihr |
|
| |
22 |
Leben und Tod auf dem Spiele stehen. |
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| |
23 |
Arch. Schweigt von dieser Person; Wofern ich |
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| |
24 |
meine Tapfferkeit verleugne/ so bin ich nicht werth/ ihr |
|
| |
25 |
Sohn zu heissen. |
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| |
26 |
Han̅. Was geht uns dieses Koͤnigreich an? |
|
| |
27 |
Arch. Weil ihrs nicht wisset/ so fraget ihr. |
|
| |
[ Seite 130 ] |
|
| |
01 |
Hanno. Und weil ich keine Ursache vor mir sehe/ |
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02 |
so muß ich die Muͤtterlichen Erinnerungen wiederholen. |
|
| |
03 |
|
|
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04 |
Arch. Mein Gedaͤchtnis hat noch keinen Schaden |
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05 |
gelidten. |
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| |
06 |
Han̅. Aber die Hoffnung einer hoͤchst--geliebten |
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| |
07 |
Person koͤnte Schaden leiden. |
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| |
08 |
Arch. Jch habe noch nicht gehoͤret/ daß ein Koͤniglicher |
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09 |
Prinz aus Africa unter den Rebellen geblieben |
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10 |
waͤre. Jch sage noch einmahl: Folget mir |
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| |
11 |
nach. |
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| |
12 |
Han̅. Ach der Himmel mache meine Furcht zu |
|
| |
13 |
nichte│ |
|
| |
14 |
Dritter Handlung |
|
| |
15 |
Funffzehnder Aufzug. |
|
| |
16 |
[ Jnwendig werden Trompeten und Paucken |
|
| |
17 |
gehoͤret/ darzu wird geschrien und |
|
| |
18 |
gefochten/ als im Streite. ] |
|
| |
19 |
Radirobanes, Virtiganes, Cornius. |
|
| |
20 |
Rad. |
|
| |
21 |
JSt es nicht moͤglich/ daß ich den Lycogenes |
|
| |
22 |
selber antreffen kan? |
|
| |
23 |
Virt. Er hat bey den Seinigen so viel zu verrichten/ |
|
| |
24 |
daß er unser nicht abwarten kan. |
|
| |
25 |
Rad. Jch beschimpfe den Koͤniglichen Arm/ wo |
|
| |
26 |
lauter gemeine Buben von meinem Schwerdte sterben |
|
| |
27 |
sollen. |
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| |
[ Seite 131 ] |
|
| |
01 |
Virt. Der Streit laͤsset sich dergestalt an/ daß wir |
|
| |
02 |
das Spiel noch viel Stunden fortsetzen muͤssen; |
|
| |
03 |
Denn gegen desperate Feinde muß die gantze Macht |
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| |
04 |
gebrauchet werden. |
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| |
05 |
Corn. Jch kan mich ruͤhmen/ daß ich hier das erste |
|
| |
06 |
Blut vergossen habe. |
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| |
07 |
Rad. Nehmt euch in acht/ liebster Vetter; Jhr |
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| |
08 |
muͤsst zwar in solchen Schulen aufwachsen: Doch |
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| |
09 |
ihr muͤsset euch vor Schaden huͤten/ damit euer |
|
| |
10 |
Wachßthum nicht gehindert werde. |
|
| |
11 |
Corn. Soll ich dem Reiche Sardinien zu Troste |
|
| |
12 |
leben/ so wird kein Feind gegen mich etwas ausrichten: |
|
| |
13 |
Soll ich aber in diesem Streite mein Leben lassen/ |
|
| |
14 |
wo koͤnte ich gluͤckseliger sterben? |
|
| |
15 |
Virt. Bleibet hier; Dort scheinet es staͤubich; |
|
| |
16 |
Wir werden die Compagnie vermehren. [ geht ab. ] |
|
| |
17 |
Dritter Handlung |
|
| |
18 |
Sechzehnder Aufzug. |
|
| |
19 |
Cornius, Nicopompus. |
|
| |
20 |
Nicop. |
|
| |
21 |
NUn das ist mein erstesmahl/ daß ich in den Krieg |
|
| |
22 |
ziehe. Und da ich meinen Degen ausziehen will/ |
|
| |
23 |
so haben mir die Maͤuse oder die Sperlinge was in |
|
| |
24 |
die Scheide gethan/ daß ich mit meinem Feinde nothwendig |
|
| |
25 |
Friede machen muß. |
|
| |
26 |
Com. Wer seyd ihr? Steht und gebt mir Antwort/ |
|
| |
27 |
oder ich ruffe meinen Cameraden. |
|
| |
[ Seite 132 ] |
|
| |
01 |
Nic. Jch gebe keine Antwort/ und auf eure Cameraden |
|
| |
02 |
kan ich nicht warten. |
|
| |
03 |
Corn. Sagt/ ob ihr Freund seyd. |
|
| |
04 |
Nic. Jch bin aller Leute Freund. |
|
| |
05 |
Com. Jch frage/ zu welcher Parthey ihr gehoͤret. |
|
| |
06 |
Nic. Zu derselbigen/ darin ihr seyd. |
|
| |
07 |
Corn. Worin bin ich? |
|
| |
08 |
Nic. Bey mir. |
|
| |
09 |
Corn. ( entbloͤst den Degen. ) Daß ihr sehen |
|
| |
10 |
solt/ wie ich vor keinem langen Stecher erschrecken |
|
| |
11 |
will/ so kommt doch her/ und lasst euch fragen: Wer |
|
| |
12 |
seyd ihr/ und was habt ihr an diesem Orte zu schaffen? |
|
| |
13 |
Nic. Das ist gewiß Herr Lycogenis sein Vetter; |
|
| |
14 |
Jch muß nach seinem Willen reden. |
|
| |
15 |
Corn. Hab ich noch keine Antwort? |
|
| |
16 |
Nic. Jch bin auf der Voͤlcker Seite wider den |
|
| |
17 |
Koͤnig. |
|
| |
18 |
Corn. Du Hund/ so bist du der rechte. Gib dich |
|
| |
19 |
gefangen. |
|
| |
20 |
Nic. Nein/ nein; Jch versprach mich/ ich gehoͤre |
|
| |
21 |
an den Koͤniglichen Hof. |
|
| |
22 |
Corn. Die Schelmen sind die aͤrgsten/ die von dem |
|
| |
23 |
Hofe zum Feinden/ als Spionen/ uͤberlauffen. |
|
| |
24 |
Nic. Gewiß ich will schweren. |
|
| |
25 |
Com. Ein meineydiger Schelme darff keinen |
|
| |
26 |
Schwur thun. Gib dich gefangen. |
|
| |
27 |
Nic. Da bin ich. |
|
| |
28 |
Corn. lege das Gewehr nieder. |
|
| |
29 |
Nic. Da ist alles. |
|
| |
30 |
Corn. Zeuch die Kleider aus. |
|
| |
31 |
[ Er agirt possirlich mit ihm. ] |
|
| |
[ Seite 133 ] |
|
| |
01 |
Nic. Ach Gnade/ Gnade│ daß ich nicht alles verliere. |
|
| |
02 |
|
|
| |
03 |
Corn. Nun trage mir die Beute auch selbst hinein. |
|
| |
04 |
[ Es wird geblasen/ und inwendig scharff |
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| |
05 |
gefochten. ] |
|
| |
06 |
Dritter Handlung |
|
| |
07 |
Siebzehnder Aufzug. |
|
| |
08 |
Lycogenes, Anaximander, Menocrit'. |
|
| |
09 |
Men. |
|
| |
10 |
SO ist der Sieg unmoͤglich/ wenn die Soldaten |
|
| |
11 |
durchgehen. |
|
| |
12 |
Anax. Und die tapffersten Officirer bestehen mit |
|
| |
13 |
Schanden/ wenn sich niemand commendiren laͤsst. |
|
| |
14 |
Lyc. Wer haͤtte sich des verfluchten Koͤniges aus |
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| |
15 |
Sardinien versehen. Sicilien muß zur Beute werden: |
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| |
16 |
Aber Lycogenes schickt sich besser auf den |
|
| |
17 |
Thron als Radirobanes -n. |
|
| |
18 |
Men. Die Flucht ist uns verboten. |
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| |
19 |
Anax. Und das Gefaͤngnis ist aͤrger/ als der Tod. |
|
| |
20 |
Lyc. So muͤssen wir sterben. |
|
| |
21 |
Men. O was vor gefaͤhrliche Nachfolger hat Poliarchus │ |
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22 |
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23 |
Anax. Und wie gluͤcklich haͤtten wir gegen dieselben |
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24 |
fechten wollen. |
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25 |
Lyc. Es ist nicht Zeit zu wuͤnschen; Die schleunige |
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26 |
That muß das beste thun. Mich duͤnckt/ das |
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27 |
Lager ist auf einer Seite allzubloß; Wenn ein |
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28 |
Brand da versucht wuͤrde/ so haͤtten wir in der |
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29 |
Confusion zum wenigsten die Flucht offen. |
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[ Seite 134 ] |
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01 |
Men. Jch will mich darzu brauchen lassen. |
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02 |
Anax. So will ich in unserm Lager fechten helfen. |
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03 |
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04 |
Dritter Handlung |
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05 |
Achtzehnder Aufzug. |
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06 |
Archombrotus, Hanno. |
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07 |
Han̅. |
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08 |
GLeich dahin nahm er die Flucht. |
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09 |
Arch. War es Lycogenes ? |
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10 |
Han̅. Ja/ ja/ wie ich sage. |
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11 |
Arch. Wer war um ihn? |
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12 |
Han̅. Etliche Officirer. Doch wer ihn einholen |
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13 |
will/ der wird sich nicht saͤumen duͤrffen. |
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14 |
Arch. Der Himmel helffe/ daß ich dem Koͤnige |
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15 |
mit meiner Tapfferkeit zuvor komme. |
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16 |
Han̅. Er hatte sein grausames Gesichte noch nicht |
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17 |
abgeleget. |
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18 |
Arch. Das mag er auch im Tode behalten/ wenn |
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19 |
ich sein Blut zur Beute davon trage. |
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20 |
Han̅. Ich kan den gefaͤhrlichen Gang nicht verhindern. |
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[ Seite 135 ] |
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01 |
Dritter Handlung |
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02 |
Neunzehnder Aufzug. |
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03 |
Sitalces, Cornius. |
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04 |
Sit. |
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05 |
JHr Gnaden haben nicht wohl gethan/ daß sie |
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06 |
einen von der Koͤniglichen Hoffstadt berauben. |
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07 |
Corn. Zum wenigsten habe ich wohl gethan/ daß |
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08 |
ein unverschaͤmter Luͤgner ist gestraft worden. |
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09 |
Sit. Die Kleider muͤssen ihm zugestellet werden. |
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10 |
Corn. Die Beute war nicht der Wuͤrdigkeit/ daß |
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11 |
man sich dadurch bereichern wolte. Aber wo ist |
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12 |
unser Koͤnig? |
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13 |
Sit. Er sucht der Feinde General. |
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14 |
Corn. Und da kommt er mit einen andern Herrn. |
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15 |
in ein Gefechte. |
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16 |
it. Das ist eine Ehre/ welche niemand unserm |
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17 |
Koͤnige rauben soll. |
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18 |
Corn. So muß er bey Zeiten Nachricht haben. |
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19 |
Jch will von weiten zusehen. |
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20 |
Dritter Handlung |
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21 |
Zwanzigster Aufzug. |
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22 |
[ Die mittelste Scene eroͤffnet sich. ] |
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| |
23 |
Meleander, Cleobulus. |
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24 |
Mel. |
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| |
25 |
SO koͤmmt die Nachricht auf unserer Seite so |
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26 |
gluͤckselig? |
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| |
[ Seite 136 ] |
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01 |
Cleob. Viel Tausend haben sich aus demuͤthiger |
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02 |
Reue unter unsern Schutz begeben; Sonderlich |
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03 |
weil sie mehr durch fremden Zwang/ als durch eigene |
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| |
04 |
Boßheit gesuͤndiget haben. |
|
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05 |
Mel. Die geniessen der Vergebung nicht unbillich. |
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| |
06 |
Cleob. Es ist ohne dem besser einen Buͤrger erhalten/ |
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07 |
als hundert Feinde todtschlagen. |
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08 |
Mel. Aber was hat man sich gegen die Halsstarrigen |
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09 |
zu vermuthen? |
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| |
10 |
Cleob. Es ist ihnen leid/ daß der Weg zur Flucht |
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| |
11 |
allmaͤhlich verboten wird. |
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| |
12 |
Mel. Der Koͤnig von Sardinien hat seine Macht |
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13 |
allzugeschwinde gewiesen. |
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| |
14 |
Cleob. Unvermuthete Gefahr macht ein ungemeines |
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15 |
Schrecken. |
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| |
16 |
Mel. Der Sieg ist kostbar; Doch wo wird der |
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| |
17 |
Uberwinder seine Zahlung haben wollen? |
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18 |
Cleob. Es scheinet/ als wenn diese Tapfferkeit mit |
|
| |
19 |
keinem geringen Lohne werde zufrieden seyn. |
|
| |
20 |
Mel. Und ich befuͤrchte/ es moͤchte dieser Freund |
|
| |
21 |
etwas gefaͤhrliches anrichten/ wofern unser Wille mit |
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| |
22 |
dem seinigen nicht uͤberein stimmen moͤchte. |
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| |
23 |
Cleob. Lycogenes liegt wohl zu Boden: Aber |
|
| |
24 |
wenn ein ander aufstuͤnde/ der Lycogenis Hoffnung |
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| |
25 |
mit besserem Nachdrucke fortsetzen wolte? |
|
| |
26 |
Mel. Jch komme gleich von der Prinzeßin her/ |
|
| |
27 |
und befinde ihr Gemuͤthe zu dergleichen Vorschlage |
|
| |
28 |
so uͤbel disponiret/ daß ich auf begebenden Fall wenig |
|
| |
29 |
zu rathen wuͤste. |
|
| |
30 |
Cleob. Die Sache muß erwartet werden. Leere |
|
| |
31 |
Hoffnung und langsame Antwort hat in solchen |
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| |
[ Seite 137 ] |
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01 |
Faͤllen das beste gethan: Doch wo er im Gesichte |
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| |
02 |
seiner Armée die Freywerbung anstellete/ muͤste sich |
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03 |
die Prinzeßin nicht mißfallen lassen/ durch eine unvergnuͤgte |
|
| |
04 |
Liebe Siciliens Wohlfahrt zu erkauffen. |
|
| |
05 |
Mel. Der Rath ist gut; Aber ein Vater/ der ihn |
|
| |
06 |
practiciren will/ der muß gegen seine Tochter die |
|
| |
07 |
hoͤchste Grausamkeit versuchen. |
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| |
08 |
Dritter Handlung |
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| |
09 |
Ein und zwantzigster Aufzug. |
|
| |
10 |
Meleander, Cleobulus, Archombrotus. |
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| |
11 |
Archombr. |
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| |
12 |
[ wirfft Lycogenis Haupt dem Koͤnige vor |
|
| |
13 |
die Fuͤsse. ] |
|
| |
14 |
DA ist nun der unruhige Lycogenes, welcher |
|
| |
15 |
den Frieden bishero verstoͤret hat: Allein ich |
|
| |
16 |
nehme die Buͤrgschaft auf mich/ daß er ins kuͤnftige |
|
| |
17 |
dergleichen Suͤnde nicht begehen soll. |
|
| |
18 |
Mel. Jst das Lycogenes ? Wer hat sich an den |
|
| |
19 |
kuͤhnen Mann gewaget? |
|
| |
20 |
Arch. Diese Faust hat den Sieg angefangen und |
|
| |
21 |
vollendet. Jch aber gratulire mir zum hoͤchsten/ |
|
| |
22 |
daß Jhr. Maj. ein offenbares Merckzeichen meiner |
|
| |
23 |
unaussetzlichen Treue vor Augen haben. |
|
| |
24 |
Mel. ( umfasset ihn. ) O seyd willkommen/ ihr |
|
| |
25 |
Preiß--wuͤrdiger Unbekannter│ Und wofern euch die |
|
| |
26 |
Geburt den Koͤniglichen Stand mißgoͤnnen will/ so |
|
| |
27 |
nehmt das Zeugnis von mir an/ daß ihr wuͤrdig |
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| |
[ Seite 138 ] |
|
| |
01 |
seyd/ der maͤchtigsten Koͤnige Freundschaft zu geniessen. |
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02 |
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03 |
Arch. Jch bin zu geringe/ und meine Verdienste |
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04 |
sind zu schwach/ solche hohe Ehr--Bezeugungen anzunehmen. |
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| |
05 |
|
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06 |
Mel. Allein wo ist der Koͤnig aus Sardinien ? |
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07 |
Arch. Er wird gleich folgen. Denn mit dem |
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08 |
Streiten ist es gethan; Und weil sich alle gern submittiren/ |
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| |
09 |
so ist beliebet worden des Buͤrgerlichen |
|
| |
10 |
Blutes zu verschonen. |
|
| |
11 |
Mel. So wird unsere Schuldigkeit erfodern/ den |
|
| |
12 |
Uberwinder einzuholen. [ gehen ab. ] |
|
| |
13 |
Dritter Handlung |
|
| |
14 |
Zwey und zwanzigster Aufzug. |
|
| |
15 |
Radirobanes, Virtiganes. |
|
| |
16 |
Rad. |
|
| |
17 |
WAs hilfft uns nun alle Tapfferkeit/ da mir der |
|
| |
18 |
nichts--wuͤrdige unbekannte Kerl den hoͤchsten |
|
| |
19 |
Ruhm vor dem Munde wegnimt. |
|
| |
20 |
Virt. Es ist geschehen; Und was von einem andern |
|
| |
21 |
ist verrichtet worden/ das ist alles auf gute Secunde |
|
| |
22 |
der Sardinischen Waffen erfolget. |
|
| |
23 |
Rad. Jndessen muß mich dieses kraͤncken/ weil derjenige/ |
|
| |
24 |
der sich um der Prinzeßin Gunst bewerben |
|
| |
25 |
will/ so einen herrlichen Vortheil vor mir geniessen |
|
| |
26 |
soll. |
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| |
27 |
Virt. Niedrige Personen verlieben sich so lange/ |
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| |
[ Seite 139 ] |
|
| |
01 |
bis sie durch maͤchtige Intervenienten verdrungen |
|
| |
02 |
werden. |
|
| |
03 |
Rad. Jch weiß/ was die Klugheit und die Billigkeit |
|
| |
04 |
haben will. Doch als ich itzo der Prinzeßin |
|
| |
05 |
meine Hoͤfligkeit offerirte/ so haͤtte ich mich eines bessern |
|
| |
06 |
Gesichtes getroͤstet. |
|
| |
07 |
Virt. Das Frauenzimmer sucht ihren besten |
|
| |
08 |
Ruhm in der Schamhaftigkeit. |
|
| |
09 |
Rad. Der Sache muß mit aller Gewalt gerathen |
|
| |
10 |
werden. Ehe ich ohne die Prinzessin wider in mein |
|
| |
11 |
Reich kehre/ ehe muß das Blut--Bad von neuen angefangen |
|
| |
12 |
werden. |
|
| |
13 |
Virt. Koͤnig Meleander wird die Sache entscheiden. |
|
| |
14 |
|
|
| |
15 |
Rad. Jch will an meinem Suchen nichts ermangeln |
|
| |
16 |
lassen. Jn dessen macht euch bey der Hofemeisterin |
|
| |
17 |
Selenisse bekannt/ ob dieselbe vielleicht durch |
|
| |
18 |
Geschencke moͤchte zu uͤberwinden seyn. |
|
| |
19 |
Virt. Was ist gegen die Geschencke unuͤberwindlich? |
|
| |
20 |
Und wo diese Person auf unserer Seite steht/ |
|
| |
21 |
so werden die uͤbrigen Liebhaber zu Schanden. |
|
| |
22 |
Rad. Gehet und gedencket an euren Koͤnig. |
|
| |
23 |
[ Virtiganes geht ab. ] |
|
| |
24 |
Ach was hat die Liebe vor Wirckung│ Als ich in |
|
| |
25 |
Sardinien der Prinzeßin Bildnis sahe/ war ich dergestalt |
|
| |
26 |
eingenommen/ daß ich mit einer gantzen Flotte |
|
| |
27 |
hieher ziehen muste. Nun ich aber das Original erblicket |
|
| |
28 |
habe/ so beduͤrffte ich einen Steuermann/ der |
|
| |
29 |
mich selbst regiren koͤnte. Ach Argenis, hier ist ein |
|
| |
30 |
Gemuͤthe/ welches seine Segel/ seinen Mast und sein |
|
| |
31 |
gantzes Schiff der Sicilianischen Prinzeßin zur |
|
| |
32 |
Commando uͤberliefert. |
|
| |
[ Seite 140 ] |
|
| |
01 |
Dritter Handlung |
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| |
02 |
Drey und zwanzigster Aufzug. |
|
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03 |
Meleander, Radirobanes. |
|
| |
04 |
Mel. |
|
| |
05 |
GEsegnet sey der Ort/ da sich der Schutz--Gott |
|
| |
06 |
dieses Koͤnigreiches nach erhaltenem Siege wiantreffen |
|
| |
07 |
laͤsset. |
|
| |
08 |
Rad. Und gesegnet sey die Stunde/ da in Sicilien |
|
| |
09 |
die Sardinische Freundschaft erkennet wird. |
|
| |
10 |
Mel. An dem Erkaͤntnis soll es nicht mangeln/ |
|
| |
11 |
wofern das Vermoͤgen so groß ist mit wuͤrcklicher |
|
| |
12 |
Danckbarkeit zu erscheinen. |
|
| |
13 |
Rad. Die gantze Danckbarkeit bestehet hierin/ |
|
| |
14 |
daß die getreuen Dienste wohl aufgenommen/ und |
|
| |
15 |
als ein bestaͤndiges Fundament kuͤnftiger Freundschaft |
|
| |
16 |
angenommen werde. |
|
| |
17 |
Mel. Der Himmel wird noch etwas uͤbrig haben/ |
|
| |
18 |
damit unsrer Undanckbarkeit moͤchte gerathen |
|
| |
19 |
werden. |
|
| |
20 |
Rad. Jch sage noch einmahl: Es ist keine Noth an |
|
| |
21 |
die wenigste Vergeltung zu gedencken: Aber wo es |
|
| |
22 |
mir zugelassen ist/ werde ich so kuͤhne seyn/ einigen |
|
| |
23 |
Vorschlag zu thun/ wie unsere Vertrauligkeit auf |
|
| |
24 |
viel Jahre koͤnne fortgesetzet werden. |
|
| |
25 |
Mel. Es soll uns alles hoch--angenehm seyn/ wenn |
|
| |
26 |
ein Mittel gewiesen wird/ die obliegende Schuld abzustatten. |
|
| |
27 |
|
|
| |
28 |
Rad. Unser Alter laͤsst wohl zu/ daß der Vater_ |
|
| |
[ Seite 141 ] |
|
| |
01 |
und Sohns--Titul angenommen wird. Jch bin unverheyrathet; |
|
| |
02 |
Die Koͤnigliche Prinzeßin Argenis |
|
| |
03 |
ist noch keinem Gemahl versprochen. Ach soll ich so |
|
| |
04 |
gluͤckselig seyn/ in Respect dieser Wunder--schoͤnen |
|
| |
05 |
Tochter den schoͤnsten Vater--Namen zu wiederholen. |
|
| |
06 |
|
|
| |
07 |
Mel. Es kan nichts billichers seyn/ als diese Bitte; |
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| |
08 |
Und so viel in meinen Kraͤften stehet/ so viel werde ich |
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| |
09 |
auch/ nach Anleitung der Billigkeit/ selber versprechen. |
|
| |
10 |
Rad. Ach mein Herr Vater/ warum wird die |
|
| |
11 |
Antwort noch auf dunckele Worte gesetzt? Hier ist |
|
| |
12 |
meine Person/ meine Kriegs--Flotte/ ja mein eigenes |
|
| |
13 |
Koͤnigreich/ in des Herrn Vaters Gewalt; Wenn |
|
| |
14 |
ich nur in dem einzigen Stuͤcke meiner ungeduldigen |
|
| |
15 |
Hoffnung zu einem erfreulichen Ausgange helffen |
|
| |
16 |
kan. |
|
| |
17 |
Mel. Geliebtester Sohn/ denn eben mit dem Titel |
|
| |
18 |
will ich bezeugen/ daß mir der geschehene Vortrag |
|
| |
19 |
hoͤchst--angenehm erscheinet. Geliebtester Sohn/ |
|
| |
20 |
deßwegen werden Koͤnigliche Prinzeßinnen geboren/ |
|
| |
21 |
daß sie andere Prinzen ihres Gebluͤtes vergnuͤgen |
|
| |
22 |
sollen. Mein Wort ist vollkommen da; Daß |
|
| |
23 |
ich aber zu der voͤlligen Zusage noch etwas an mir |
|
| |
24 |
halte/ solches wird an mir um so viel desto weniger zu |
|
| |
25 |
tadeln seyn/ weil ich vor langer Zeit an meine Prinzeßin |
|
| |
26 |
zu einiger Freyheit auferzogen habe: Also werde |
|
| |
27 |
ich doch ihr die Ehre nicht mißgoͤnnen duͤrffen/ daß |
|
| |
28 |
sie in einer Sache um ihren Willen gefraget wird/ |
|
| |
29 |
da sie doch den ernsten Willen/ auf vaͤterlicher Seite/ |
|
| |
30 |
schon verstanden hat. |
|
| |
31 |
Rad. Jch wiederhole meine demuͤthigste Bitte/ |
|
| |
[ Seite 142 ] |
|
| |
01 |
und kuͤsse die Hand/ welche den Ausspruch meines |
|
| |
02 |
Gluͤckes unterzeichnen soll. |
|
| |
03 |
Mel. Jch wiederhole mein voriges Wort/ und bitte |
|
| |
04 |
den Koͤniglichen Herrn Sohn/ der ersten Solennitaͤt/ |
|
| |
05 |
wegen der unvergleichlichen Victorie/ beyzuwohnen. |
|
| |
06 |
|
|
| |
07 |
Dritter Handlung |
|
| |
08 |
Vier und zwanzigster Aufzug. |
|
| |
09 |
Selenissa, Virtiganes. |
|
| |
10 |
Sel. |
|
| |
11 |
JCh muß mich vor der unvergleichlichen Freygebigkeit |
|
| |
12 |
schaͤmen; Und da ich sonst dem Koͤnige |
|
| |
13 |
von Sardinien mit aller moͤglichsten Aufwartung |
|
| |
14 |
waͤre entgegen gegangen/ so werde ich eben deßwegen |
|
| |
15 |
etwas langsamer seyn/ damit ich den Namen |
|
| |
16 |
nicht verdiene/ als waͤre ich erkaufft worden. |
|
| |
17 |
Virt. Meine Frau hat keine Ursache den geringen |
|
| |
18 |
Werth dieser Kleinodien zu ruͤhmen; Solten die guten |
|
| |
19 |
Dienste zu einigem Ausgange gedeyen/ so wuͤrde |
|
| |
20 |
die rechte Belohnung erst ihren Anfang nehmen: |
|
| |
21 |
Denn der Koͤnig wird Sicilien nicht verlassen/ als |
|
| |
22 |
in Gesellschaft der Wunder--schoͤnen Prinzeßin. |
|
| |
23 |
Allein was hat doch die Durchlauchtigste Person an |
|
| |
24 |
dem Auslaͤnder Archombrotus ersehen/ daß derselbe |
|
| |
25 |
bey der unverdienten Gnade hochmuͤthig wird? |
|
| |
26 |
Sel. Ach mein Herr/ was macht er sich vor eitele |
|
| |
27 |
Gedancken? Der gute Archombrotus ist an dem |
|
| |
28 |
Verdachte und an dem Hasse unschuldig. Es ist |
|
| |
[ Seite 143 ] |
|
| |
01 |
ein ander Prinz/ der das erste Versprechen der heimlichen |
|
| |
02 |
Liebe aus der Prinzeßin Munde erhalten hat. |
|
| |
03 |
Virt. So hoͤre ich/ daß wir an der Person/ doch |
|
| |
04 |
nicht in der Furcht gefehlet haben. |
|
| |
05 |
Sel. Es stecken etliche Geheimniße dahinter/ welche |
|
| |
06 |
dem Koͤnige/ bey erster Gelegenheit sollen offenbaret |
|
| |
07 |
werden: Doch daß ich anitzo nur etwas gedencke/ |
|
| |
08 |
so wuͤrde es schwer seyn/ der Prinzeßin Liebe |
|
| |
09 |
zu geniessen/ wo der erste Liebhaber nicht aus dem |
|
| |
10 |
Wege geraͤumet wird. |
|
| |
11 |
Virt. Wer an unbekannten Orten lebet/ der ist |
|
| |
12 |
schwerlich ums Leben zu bringen. |
|
| |
13 |
Sel. So muͤssen wir auf andere List gedencken: |
|
| |
14 |
Die Prinzeßin kan mit guten Gewissen keinen andern |
|
| |
15 |
heyrathen/ weil sie geschworen hat: Allein wenn |
|
| |
16 |
sie entfuͤhret wuͤrde/ so muͤste der Zwang/ an stat einer |
|
| |
17 |
Dispensation/ wider den Meineyd dienen. |
|
| |
18 |
Virt. Dieser Anschlag laͤsset sich besser ins Werck |
|
| |
19 |
setzen/ sonderlich/ da unsere Flotte noch beysammen |
|
| |
20 |
ist; Und ob gleich der Koͤnig beschlossen hat/ zu Erleichterung |
|
| |
21 |
dieses Landes den meisten Theil voran#zu schicken/ |
|
| |
22 |
werden doch so viel Schiffe zuruͤck bleiben/ |
|
| |
23 |
dabey man allen Difficultaͤten wird begegnen koͤnnen. |
|
| |
24 |
Sel. Sind doch alle Fabeln voll Goͤtter/ welche |
|
| |
25 |
Jungfern geraubet haben. Der Koͤnig in Sardinien |
|
| |
26 |
wird keinen Schimpf verdienen/ wenn er Goͤtter |
|
| |
27 |
zu Vorgaͤngern hat. |
|
| |
28 |
Virt. Der Rath soll in acht genommen/ und mit |
|
| |
29 |
schoͤnster Vergeltung angesehen werden. |
|
| |
[ Seite 144 ] |
|
| |
01 |
Vierdter Handlung |
|
| |
02 |
Erster Aufzug. |
|
| |
03 |
Virtiganes, Labachanes. |
|
| |
04 |
Lab. |
|
| |
05 |
WArum sollen wir mit unserm Gewehr parat |
|
| |
06 |
seyn? Wo wir den Sicilianern keinen |
|
| |
07 |
ungleichen Verdacht erwecken wollen/ so |
|
| |
08 |
muͤssen wir auch von aussen als Freunde bekleidet |
|
| |
09 |
gehen. |
|
| |
10 |
Virt. Ach mein Freund/ es ist nicht von noͤthen/ |
|
| |
11 |
daß wir dem Koͤniglichen Befehle nachgruͤbeln; Es |
|
| |
12 |
ist was grosses im Wercke/ welches noch zur Zeit |
|
| |
13 |
muß verschwiegen seyn. |
|
| |
14 |
Lab. Jch sehe nichts mitten in der Freude/ was |
|
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15 |
entstehen solte/ dabey die Waffen von noͤthen waͤren. |
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16 |
Virt. Mein Freund/ ich handelte wider unsere |
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17 |
Vertrauligkeit/ wenn ich das Werck vor ihm verbergen |
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18 |
solte/ welches in wenig Stunden viel wunderliche |
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19 |
Discourse nach sich ziehen wird. |
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20 |
Lab. Die Erzehlung will ich als ein Zeugnis unserer |
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21 |
gepflogenen Bekanntschaft annehmen. |
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22 |
Virt. Die Prinzeßin begehet heute ihren Geburts--Tag |
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23 |
Solchen will unser Koͤnig hier an dem Ufer |
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24 |
feyerlich halten: Und weil er ein kuͤnstliches Feuer--Werck |
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25 |
in dem Wasser will spielen lassen/ so wird das |
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26 |
Schiff herzu gefuͤhret/ darin die Koͤniglichen Personen |
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27 |
dem Spiele zusehen sollen. |
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[ Seite 145 ] |
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01 |
Lib. Zu dieser Solennitaͤt brauchen wir weder |
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02 |
Spiesse noch Degen. |
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03 |
Virt. Allein so bald der Trompeter auf Koͤniglichem |
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04 |
Befehl wird ein Zeichen geben/ so werden die |
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05 |
Lichter ausleschen/ und Meleander wird mit seiner |
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06 |
Prinzeßin/ als eine Beute der bisherigen Victorie/ |
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07 |
in Sardinien folgen muͤssen. |
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08 |
Lib. Jst es moͤglich/ daß wir die gute Affection |
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09 |
der Sicilianer mit solchen Undancke belohnen sollen? |
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10 |
Virt. Wir sind Diener; Was wir dabey verrichten/ |
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11 |
geschiehet auf eines andern Verantwortung. |
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12 |
Lib. So mercke ich wohl/ daß wir in kurtzer Zeit |
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13 |
die Freude mit einem verdrießlichen Gefechte beschliessen |
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14 |
moͤchten. |
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15 |
Vierdter Handlung |
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16 |
Anderer Aufzug. |
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17 |
Meleander, Radirobanes, Argenis. |
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18 |
Mel. |
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19 |
DJeser Weitlaͤufftigkeit haͤtten wir uns nicht |
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20 |
versehen. Die Muͤhwaltung ist zu groß/ welche |
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21 |
unsertwegen gemacht wird. |
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22 |
Rad. Es ist eine schlechte Bedienung in fremden |
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23 |
Landen/ da auch ein geringes Werck von dem guten |
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24 |
Willen zeugen muß. Absonderlich ist gegen meine |
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25 |
Wunder--schoͤne Prinzeßin die gehorsame Bitte/ den |
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| |
26 |
Fehler selbst zu entschuldigen/ wofern der Preißwuͤrdige |
|
| |
27 |
Geburts--Tag mit allzuschlechten Solennitaͤten |
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28 |
begangen wird. |
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[ Seite 146 ] |
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01 |
Arg. Vielmehr muß ich an eine Entschuldigung |
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02 |
dencken/ daß ich der hohen Wohlthat nach Wuͤrden |
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03 |
nicht begegnen kan. |
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| |
04 |
Rad. Meine Schoͤnste/ sie weis mein Verlangen/ |
|
| |
05 |
und ich bin begierig/ mein Dienst--ergebenes Gemuͤthe |
|
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06 |
zu erklaͤren. Doch wir haben Zeit in dem Gezelte |
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07 |
unsere Discourse fortzusetzen. |
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08 |
Mel. Wer sich zum Wirthe auffgeworffen hat/ |
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| |
09 |
der mag seinen Gaͤsten befehlen. |
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| |
10 |
Rad. Der Befehl bestehet in einer demuͤthigen |
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| |
11 |
Bitte. [ Sie setzen sich in die mittelste Scene. ] |
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12 |
Vierter Handlung |
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13 |
Dritter Aufzug. |
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14 |
Archombrotus, Eurymedes. |
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15 |
Arch. |
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| |
16 |
WJr sind verloren/ wo uns der Himmel nicht |
|
| |
17 |
ein sonderbares Wunderwerck erzeiget. |
|
| |
18 |
eur. Jst es moͤglich/ daß iemand meine Gedancken |
|
| |
19 |
errathen soll? Jch befuͤrchte/ Lycogenes ist mit |
|
| |
20 |
seiner Seele in diesen boßhaftigen Koͤnig gefahren. |
|
| |
21 |
Arch. Es ist nicht anders/ unser Koͤnig soll mit der |
|
| |
22 |
Prinzeßin davon gefuͤhret werden. Die Soldaten |
|
| |
23 |
aus Sardinien sind alle bewehrt/ die besten Sachen |
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24 |
sind aus der Stadt in die Schiffe gebracht/ und der |
|
| |
25 |
Sardinische Patient/ der doch so gefaͤhrlich kranck |
|
| |
26 |
darnieder lag/ hat sich selbst muͤssen zu Schiffe begeben. |
|
| |
27 |
|
|
| |
28 |
Eur. Hier wird ein schleuniger Rath von noͤthen |
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| |
29 |
seyn. |
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| |
[ Seite 147 ] |
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01 |
Arch. Jch habe den Soldaten Ordre gegeben/ |
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| |
02 |
mit ihrem Gewehre zu erscheinen: Aber der Koͤnig |
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03 |
muß alsofort Nachricht davon haben. |
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| |
04 |
Eur. Der liebe Herr wird diesem geschwinden Zufalle |
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| |
05 |
wenig zu helffen wissen. |
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| |
06 |
Arch. Er nehme die Muͤhe auf sich/ und erinnere |
|
| |
07 |
den Koͤnig; Jch will der Prinzeßin einen guten |
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08 |
Rath geben: Sie soll sich kranck stellen/ damit haben |
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| |
09 |
wir gute Ursache in die Stadt zu kehren. |
|
| |
10 |
Eur. Jn besorglichen Begebenheiten muͤssen die |
|
| |
11 |
ersten Anschlaͤge die besten seyn. |
|
| |
12 |
[ Meleander und die uͤbrigen kom̅en heraus. ] |
|
| |
13 |
Vierdter Handlung |
|
| |
14 |
Vierdter Aufzug. |
|
| |
15 |
Die Vorigen/ Meleander, Radirobanes, |
|
| |
16 |
Argenis, Cornius, Pollio, Libachanes. |
|
| |
17 |
Mel. |
|
| |
18 |
ES scheinet doch/ die frische Luft moͤchte etwas |
|
| |
19 |
angenehmer zu schoͤpffen seyn/ als wenn wir in |
|
| |
20 |
dem Zelte sollen gefangen sitzen. |
|
| |
21 |
Rad. Es soll mir nicht mißfallen. |
|
| |
22 |
[ Eurymedes fuͤhret Meleander hinaus. Archombrotus |
|
| |
23 |
gehet auf der andern Seite |
|
| |
24 |
mit Argenis. ] |
|
| |
25 |
Rad. Wo ist mein Virtiganes ? |
|
| |
26 |
Lib. Gnaͤdigster Herr/ er befindet sich nicht weit |
|
| |
27 |
von hier. |
|
| |
28 |
Rad. Jch werde ihn suchen; Unterdessen gebt doch |
|
| |
29 |
auf die zwey artige Personen Achtung. Mein Prinz |
|
| |
[ Seite 148 ] |
|
| |
01 |
Cornius hat sich in diesen jungen Grafen verliebet/ sie |
|
| |
02 |
muͤssen einander noch weiter Gesellschaft leisten. [ g. a. ] |
|
| |
03 |
Lib. Nun wie stehts? Hat sich gleich und gleich |
|
| |
04 |
bald gesellet? |
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| |
05 |
Corn. Jhr. Maj. Haben befohlen/ allen sicilianern |
|
| |
06 |
hoͤflich zu begegnen. |
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| |
07 |
Poll. Aber ich bin am Alter und am Stande noch |
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| |
08 |
gar ungleich. |
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| |
09 |
Lib. Die Tugend wird beydes ersetzen. Doch |
|
| |
10 |
wer hat in dem neulichsten Kriege das beste gethan? |
|
| |
11 |
Corn. Der mich fragt/ der hat mich mitten in meinen |
|
| |
12 |
Progressen verhindert; Der Hof--Poete war |
|
| |
13 |
mein gefangener: Wer weis/ was ich vor einen |
|
| |
14 |
Vogel in das Gebauer darzu bekommen haͤtte. |
|
| |
15 |
Poll. Und ich kam zu langsam. Denn Jungfer |
|
| |
16 |
Aspasia sagte/ die Butter--Semmeln waͤren noch |
|
| |
17 |
nicht gebacken/ die mir wider die Nase fliegen solten. |
|
| |
18 |
Corn. So hoͤnisch duͤrffte mir ein Frauenzimmer |
|
| |
19 |
nicht begegnen. |
|
| |
20 |
Poll. Jch wolte hoͤflich seyn/ und also blieb ich ihr |
|
| |
21 |
den Schimpf bis auf andere Zeit schuldig. |
|
| |
22 |
Corn. Jch lobe die Schulden/ die bald bezahlet |
|
| |
23 |
werden. |
|
| |
24 |
Poll. Und ich sehe es lieber/ wenn ich von solchen |
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| |
25 |
Personen oft gemahnet werde: Denn die Leute |
|
| |
26 |
meines gleichen haben sonst wenig zu reden/ wenn sie |
|
| |
27 |
nicht gefraget werden. |
|
| |
28 |
Corn. Und wenn mich eine Jungfer tausendmahl |
|
| |
29 |
vexirte/ so wuͤrde sie mich nicht einmahl um die Revenge |
|
| |
30 |
mahnen. |
|
| |
31 |
Poll. Ach haͤtten alle Cavallier meinen Sinn/ die |
|
| |
[ Seite 149 ] |
|
| |
01 |
Jungfern solten am besten bezahlet werden. Denn |
|
| |
02 |
das weiß ich/ ihnen wiederfaͤhret kein groͤsser Possen/ |
|
| |
03 |
als wenn die schoͤnen Leute in den Krieg ziehen. |
|
| |
04 |
Corn. Wo wir uns unter die schoͤnen Leute zehlen |
|
| |
05 |
duͤrffen/ so haben wir die beste Gelegenheit. |
|
| |
06 |
Poll. Mein alter Hofmeister spricht: Kein |
|
| |
07 |
Mannsbild ist so heßlich/ es hat die schoͤnste Jungfer |
|
| |
08 |
verdienet. |
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| |
09 |
Corn. Wenn ich eine Jungfer waͤre/ so wuͤrde ich |
|
| |
10 |
fragen/ warum neulich in unserm Lande die heßlichste |
|
| |
11 |
Frau den schoͤnsten Mann bekommen hat. |
|
| |
12 |
Lib. Ey ihr jungen Herren/ wie weit koͤmmt es |
|
| |
13 |
mit euch? Zu meiner Zeit waren die Discourse vor |
|
| |
14 |
uns zu hoch. Jch weis nicht/ was itzo vor ein Gestirne |
|
| |
15 |
regiret; Wenn die Huͤhngen aus den Eyern |
|
| |
16 |
kriechen/ so wollen sie flugs Gackenest schreyen. |
|
| |
17 |
Corn. Wer kan davor/ daß die Welt immer kluͤger |
|
| |
18 |
wird? |
|
| |
19 |
Poll. Und wer kan davor/ daß sich die Alten so lassen |
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| |
20 |
hinter die Briefe kommen? |
|
| |
21 |
Lib. Die Koͤnigl. Personen sind da. Wir werden |
|
| |
22 |
auf die Seite treten. |
|
| |
[ Seite 150 ] |
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| |
01 |
Vierdter Handlung |
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| |
02 |
Fuͤnffter Aufzug. |
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| |
03 |
Argenis, Selenisse, Radirobanes, Sady, |
|
| |
04 |
Virtiganes, Meleander, Archombrotus, |
|
| |
05 |
Philippus, Eurymedes. |
|
| |
06 |
Arg. |
|
| |
07 |
MEine Selenisse, wo bin ich? |
|
| |
08 |
Sel. Meine Prinzeßin/ was bedeutet diese |
|
| |
09 |
Frage? |
|
| |
10 |
Arg. Es wird mir gantz finster vor den Augen; |
|
| |
11 |
Wo ich keinen Sessel habe/ so muß ich/ allem Volcke |
|
| |
12 |
zur Schande/ im Grase liegen bleiben. |
|
| |
13 |
Sel. Sie fasse einen Muth. Vielleicht hat die |
|
| |
14 |
kuͤhle Luft einige Enderung erwecket/ welche sich in |
|
| |
15 |
dem Gezelte verlieren wird. |
|
| |
16 |
Arg. Ach weh│ ich sterbe. |
|
| |
17 |
Sel. hilff Gott│ die Prinzeßin wird kranck. |
|
| |
18 |
Rad. Woher entstehet diß Ungluͤcke? Jst niemand |
|
| |
19 |
hier/ der mit staͤrckenden Wassern/ mit Balsam |
|
| |
20 |
und andern Artzneyen das Seinige thun will? |
|
| |
21 |
Mel. Was bedeutet dieser Auflauff? Wo ist |
|
| |
22 |
Herr Philippus ? |
|
| |
23 |
Phil. Der Puls gibt ein schlechtes Zeichen. Wo |
|
| |
24 |
die Prinzeßin leben soll/ so muß sie aus der Luft in ein |
|
| |
25 |
stilles Logiament gebracht werden. |
|
| |
26 |
Rad. Jn dem Gezelte wollen wir Gelegenheit schaffen/ |
|
| |
27 |
daß sie von der Luft nicht soll incom̅odiret werden. |
|
| |
28 |
Phil. Wenn ich einen Patienten habe/ so ist er mir |
|
| |
[ Seite 151 ] |
|
| |
01 |
hinter einer Wand zehnmahl besser verwahret/ als |
|
| |
02 |
hinter einem Tuche. Jn dem wir complimentiren/ |
|
| |
03 |
so haben wir die Stadt erreicht. Einen Wagen |
|
| |
04 |
her/ eine Saͤnfte her│ Es sind geringe Kranckheiten/ |
|
| |
05 |
da der Verzug kan toͤdtlich seyn. |
|
| |
06 |
Rad. Mein liebster Sady, kommt ihr doch auch |
|
| |
07 |
her/ und sagt eure Gedancken von der Kranckheit. |
|
| |
08 |
Sad. Ey/ was wollen wir groß Wesens machen? |
|
| |
09 |
Sie geben sich doch zu Frieden. Jch habe die Zeit |
|
| |
10 |
meines Lebens manchen Patienten in der Cur gehabt; |
|
| |
11 |
Und wo hier die geringste Gefahr ist/ so will ich |
|
| |
12 |
meinen Kopff zu Pfande setzen. |
|
| |
13 |
Phil. Ein Leib--Medicus, der sich der Prinzeßin |
|
| |
14 |
Gesundheit auf das Gewissen binden laͤsst/ muß etwas |
|
| |
15 |
bedachtsamer von dem Handel urtheilen. Wo die |
|
| |
16 |
hohe Patientin nicht bis auf den Tod kan verwarloset |
|
| |
17 |
werden/ so will ich in einen gluͤenden Ofen kriechen. |
|
| |
18 |
Sad. Wer den Puls/ wer den Athen/ wer die Farbe |
|
| |
19 |
verstehet/ der muß ein Kind seyn/ oder muß gestehen/ |
|
| |
20 |
daß die gesunde Constitution durch aus keinen |
|
| |
21 |
Mangel hat. |
|
| |
22 |
Ph. Hoͤrt doch/ was in dem giftigen Sardinien Gesundheit |
|
| |
23 |
heisst/ das heissen wir in Sicilien Kranckheit. |
|
| |
24 |
Sad. So/ so; haben wir nun erfahren/ wo Æsculapius |
|
| |
25 |
sein Vaterland hat? |
|
| |
26 |
Phil. Daß ihr mit dem Æsculapio schlecht bekan̅t |
|
| |
27 |
seyd/ das hoͤre ich aus dem ungeschickten Urtheil. |
|
| |
28 |
Sad. Und daß ihr ein beruͤhmter Medicus seyd/ |
|
| |
29 |
das merck ich aus der gefaͤhrlichen Patientin. Denn |
|
| |
30 |
freylich/ wer kleine Schaden groß/ und geringe Zufaͤlle |
|
| |
31 |
erschrecklich macht/ der kan grosse Discretion |
|
| |
[ Seite 152 ] |
|
| |
01 |
fodern/ und hat bey den alten Weibern desto groͤssern |
|
| |
02 |
Respect zu hoffen. |
|
| |
03 |
Phil. Der Herr lasse sich weisen: Die Qvacksalber |
|
| |
04 |
sind aus Sicilien verbannet: Aber daß die Pickelheringe |
|
| |
05 |
aus Sardinien ihre Lade zu sich genommen |
|
| |
06 |
haben/ da moͤgen sie den Ruhm davor geniessen. |
|
| |
07 |
Sad. Und wenn ich tausendmahl ein Qvacksalber |
|
| |
08 |
seyn solte/ so ist die Prinzeßin doch nicht kranck. |
|
| |
09 |
Phil. Und wenn ein Qvacksalber die Wahrheit |
|
| |
10 |
tausendmahl geredt haͤtte/ so waͤre doch dieses erlogen/ |
|
| |
11 |
daß die Prinzeßin nicht solte kranck seyn. |
|
| |
12 |
Sad. Sie ist gesund. |
|
| |
13 |
Phil. Wer das gesteht/ der ist im Gehirne contract. |
|
| |
14 |
|
|
| |
15 |
Sad. Wer das leugnet/ der soll an Ketten geschlossen |
|
| |
16 |
werden. Jch sage noch einmahl: Es ist ein |
|
| |
17 |
angenommene Kranckheit/ oder ich will in der See |
|
| |
18 |
ersauffen/ da es am tieffsten ist. |
|
| |
19 |
Rad. Verflucht sey derjenige/ der unsern Anschlag |
|
| |
20 |
eroͤffnet. |
|
| |
21 |
Mel. Mein werther Freund/ die heutige Lust wird |
|
| |
22 |
verstoͤret/ die Vorsorge vor meine einzige Prinzeßin |
|
| |
23 |
laͤsst mich nicht verziehen; Jndessen was verschoben |
|
| |
24 |
wird/ soll nicht aufgehoben seyn. |
|
| |
25 |
Rad. Jch kan es nicht zugeben/ daß mir die Aufwartung |
|
| |
26 |
versaget wird. Es soll an Artzneyen nicht |
|
| |
27 |
ermangeln; Die Luft moͤchte mehr Schaden nach |
|
| |
28 |
sich ziehen/ wenn der Lange Weg in die Stadt gesuchet |
|
| |
29 |
wuͤrde. |
|
| |
30 |
Mel. Die Saͤnfte ist schon bey uns/ da man sich |
|
| |
31 |
der Luft wegen keines Unheils besorgen darff. |
|
| |
32 |
[ Sie wird hinein getragen. ] |
|
| |
[ Seite 153 ] |
|
| |
01 |
Rad. Ach wie muß ich meiner Verachtung zuruͤcke bleiben. |
|
| |
02 |
|
|
| |
03 |
Mel. Die Vorsorge vor krancke Personen darff |
|
| |
04 |
nicht also ausgeleget werden. Jch bleibe meiner |
|
| |
05 |
Schuld/ und meiner obliegenden Danckbarkeit nochmahls |
|
| |
06 |
eingedenck. [ gehen ab. ] |
|
| |
07 |
Vierdter Handlung |
|
| |
08 |
Sechster Aufzug. |
|
| |
09 |
Radirobanes, Virtiganes, Libachanes. |
|
| |
10 |
Rad. |
|
| |
11 |
VErflucht sey die Wohlthat/ welche der undanckbare |
|
| |
12 |
Koͤnig genossen hat. |
|
| |
13 |
Virt. Und noch verfluchter sey derjenige/ der den |
|
| |
14 |
Koͤnig zu solchen Beginnen verleitet hat. |
|
| |
15 |
Lib. Es war kein Zweifel/ daß sich die Prinzeßin |
|
| |
16 |
einer falschen Kranckheit annahm. |
|
| |
17 |
Virt. Gleich als wenn sie nicht mit guter Freyheit |
|
| |
18 |
haͤtte moͤgen zu Hause bleiben. Doch der Wohlthaͤter/ |
|
| |
19 |
der nicht kunte belohnet werden/ muste sich so |
|
| |
20 |
beschimpfen lassen. |
|
| |
21 |
Lib. Mit einem kurtzen Schimpfe/ wird ofte gar |
|
| |
22 |
lange Wohlthat abgezahlet. |
|
| |
23 |
Virt. Wenn nur der andere Theil geduldig ist. |
|
| |
24 |
Lib. Warum greiffen wir nicht alsobald zur |
|
| |
25 |
Wehre? |
|
| |
26 |
Virt. Eben darum/ weil die arglistigen Sicilianer |
|
| |
27 |
ihre Soldaten mit dem Gewehr aufgeboten hatten/ |
|
| |
[ Seite 154 ] |
|
| |
01 |
daraus erhellete Sonnen--klar/ daß sie nicht anders/ |
|
| |
02 |
als die Mahler den Pinsel/ zum Fenster hinaus werffen |
|
| |
03 |
wolten/ welcher doch in dem Gemaͤhlde ihres |
|
| |
04 |
Staats so viel gutes gewircket hat. |
|
| |
05 |
Rad. Schweigt von der schaͤndlichen Materie. |
|
| |
06 |
Koͤnig Meleander ist mein Feind; Er soll auch/ als |
|
| |
07 |
ein Feind von mir tractiret werden. Meinet er etwan/ |
|
| |
08 |
daß ich seine Tochter habe entfuͤhren wollen? |
|
| |
09 |
Gewiß ich wuͤrde mich an meinem Vorfahren versuͤndigen/ |
|
| |
10 |
wenn ich eine geschimpfte Dirne/ die wohl |
|
| |
11 |
eher einen Mann in Weibes--Kleidern um sich gelidten/ |
|
| |
12 |
in das Koͤnigliche Ehebette legen solte. |
|
| |
13 |
Virt. Sie werden sich des Unterfangens schaͤmen |
|
| |
14 |
muͤssen. |
|
| |
15 |
Rad. Es soll nicht bey der Scham verbleiben. Jch |
|
| |
16 |
will ihnen zugleich darthun/ daß Sardinien noch |
|
| |
17 |
Kraͤfte uͤbrig hat/ einen Koͤnig von der Barmhertzigkeit |
|
| |
18 |
zu erschrecken. Schaffet mir einen Herold/ der |
|
| |
19 |
soll den Absage--Brief uͤberbringen. Jch will die |
|
| |
20 |
Schande seiner Tochter/ das Verstaͤndnis mit der |
|
| |
21 |
schandbaren Theocrine, ja die heimliche Unzucht |
|
| |
22 |
mit dem Poliarcho entdecken; Und wofern nicht |
|
| |
23 |
drey Millionen Goldes baar ausgezahlet werden/ |
|
| |
24 |
vor die erwiesene Huͤlffe/ soll er mich nicht verhindern/ |
|
| |
25 |
daß Sicilien meinen Soldaten zur Beute uͤberlassen |
|
| |
26 |
wird. |
|
| |
27 |
Virt. Vielleicht gibt es Meleander auf den morgenden |
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Tag wohlfeiler. |
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Rad. Wer ist Koͤnig in Sardinien / daß er mich |
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reformiren darff? Jch habe es gesagt/ und derselbe |
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mag in dem Sicilianischen Gewaͤsser sterben/ |
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01 |
eher er das Vaterland erblicken kan/ der meine gerechte |
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Sache verhindern will. Meleander ist mein |
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Feind/ und wer ihn liebet/ soll meine Verfolgung empfinden |
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[ gehet ab. ] |
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Virt. Ungluͤckselige Diener/ die einem Herrn zu |
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gehorchen haben/ der seine Fehler durch Trotz und |
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Hochmuth verbessern will. [ gehet ab. ] |
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08 |
Lib. Ungluͤckseliges Vaterland│ du wirst schlechte |
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Zeitungen erfahren/ und noch schlechtere Zeit zu gewarten |
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haben. [ gehet ab. ] |
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Vierdter Handlung |
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Siebender Aufzug. |
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Nicopompus, Gelasina. |
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Nic. |
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WAs hoͤr ich? Jst die Prinzeßin nicht kranck? |
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Gel. Jhr fehlet nichts. Aber wenn solche |
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Jungfern ihren Kopff einmahl aufsetzen/ so wird aus |
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Tage Nacht/ und aus Gesundheit ein Fieber. |
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Nic. Jch moͤchte die Ursache gern wissen? Denn |
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es verlohnet sich der Muͤh/ daß man ein Liedgen darvon |
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machte. |
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Gel. Wenn grosse Leute falsch spielen/ so machen |
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sich die Lieder gar gefaͤhrlich. Thut mirs zu gefallen |
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und haltet das Maul mit eurer Poetischen Zitter. |
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Nic. Jhr loses Kind/ ihr habt mir das Herrtze gestolen; |
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Jch muß dem Befehle gehorsam seyn. |
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